क्या है ज्यादा जरुरी: भावनात्मक समझदारी या मानसिक मजबूती

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what is more important emotionally intelligent or mentally Strength

हमारे अंदर आने वाली सभी भावनाओं का नियंत्रण हमारे दिमाग के पास के होता है। हमारे दिमाग का हिस्सा जिसे ‘इमिगडला’ कहते हैं सभी प्रकार की भावनाओं को नियंत्रित करने का काम करता है। यही वह भाग के जो परिस्थिति के अनुसार दिमाग के अलग-अलग हिस्सों में संदेश भेजता है। कई बार बहुत से लोग भावनात्मक रूप से कमजोर नजर आते है, जिसके कारण वह परिस्थिति के अनुसार कार्य नहीं कर पाते हैं। इसलिए जरुरी है कि व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत रहना चाहिए ताकि उनमें भावनात्मक समझदारी नजर आये। लेकिन क्या भावनात्मक रूप से समझदार होना और मानसिक रूप से मजबूत होना दोनों एक ही बात है, आइए जानते हैं।

क्या होती है भावनात्मक समझदारी ?
कई तरह की परिभाषाओं के अनुसार भावनात्मक रूप से समझदार होना वह है जब व्यक्ति परिस्थिति के अनुसार उत्पन्न होने वाली भावनाओं को समझने और जानने के साथ उन पर नियंत्रण रखने की क्षमता रखता हो। इसके अलावा भावनात्मक रूप से निर्णय लेने की क्षमता रखता हो, समस्याओं को सही तरीके से बिना किसी चिंता और तनाव के सुलझाने की क्षमता रखता हो। [ये भी पढ़ें:मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए जरुरी नहीं है कोई दवा या थेरेपी]

भावनात्मक समझदारी के लिए जरुरी बातें:
*आत्म जागरूकता:
जागरूक होकर ही कोई भी व्यक्ति भावनात्मक रूप से समझदार हो सकता है। यह आत्म जागरूकता से तात्पर्य है कि व्यक्ति के भीतर अपनी भावनाओं को समझ कर उस पर अमल कर सके।
*आन्तरिक प्रेरणा:
खुद के भीतर हमेशा किसी भी कार्य और परिस्थिति के लिए प्रेरणा को जागाये रखने के लिए जरुरी है। इससे व्यक्ति के भीतर भावनात्मक रूप से समझदारी बढ़ती है।

मानसिक रूप से मजबूत होना:
मानसिक रूप से मजबूत होने तात्पर्य है कि जब व्यक्ति के भीतर अपनी सोच और अपनी भावनाओं के भीतर एक संतुलन पाया जाये। साथ ही साथ मानसिक रूप से मजबूत होने से मतलब है कि व्यक्ति भीतर से किसी भी कार्य के लिए आत्मविश्वासी हो।

मानसिक रूप से मजबूत होने के लिए जरुरी बातें:
अपने भीतर सोचने-समझने की क्षमता को बढ़ायें:
व्यक्ति अपने अंदर सोचने-समझने की क्षमता को बढ़ा कर मानसिक रूप से मजबूत हो सकता है। इसके लिए जरुरी है कि व्यक्ति हर एक परिस्थिति में अपनी सोच का इस्तेमाल करें, ना कि भावनात्मक रूप से परिस्थिति से का समाना करें।

अपनी भावनाओं पर ठीक तरह से नियंत्रण रखें:
कई बार इस तरह की परिस्थिति आ जाती है जब व्यक्ति अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाता है। इसका एक मात्र कारण यह होता है  कि व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत नहीं है। इसलिए मानसिक रूप से मजबूत होने के लिए जरुरी है कि व्यक्ति अपनी भावनाओं पर ठीक तरह से नियंत्रण रखे और परिस्थिति के अनुसार खुद की भावनाओं को प्रकट करे। [ये भी पढ़ें :मानसिक स्वास्थ्य पर गहराता सोशल मीडिया का असर]

भावनात्मक समझदारी में मानसिक मजबूती अंतर:
भावनात्मक रूप से समझदार होना, मानसिक रूप से मजबूत होने का एक हिस्सा माना जा सकता है लेकिन मानसिक रूप से मजबूत होना व्यक्ति की भावनाओं से परे है और व्यक्ति के जीवन में विचार और व्यवहार व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रभावित करती है।

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