अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाते हैं तो हो सकती है फ्लैट इफेक्ट की समस्या

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What causes flat effect and how to treat it

Pic Credit: redorbit.com

फ्लैट इफेक्ट एक ऐसी स्थिति है जिसके दौरान लोग अपनी भावनाओं को अन्य लोगों की तरह व्यक्त नहीं कर पाते हैं। फ्लैट इफेक्ट खुद में कोई मानसिक अवस्था या डिसऑर्डर नहीं है बल्कि यह किसी और अवस्था का संकेत हो सकता है। जब कोई व्यक्ति खुश होता है, तो वह मुस्कुराहट या किसी अन्य तरीके से अपनी खुशी को व्यक्त करता है लेकिन फ्लैट इफेक्ट से ग्रस्त व्यक्ति के चेहरे पर खुश होने के बाद भी कोई भाव नहीं दिखते हैं। यह अवस्था किन कारणों से होती है और इसके दौरान व्यक्ति में कौन से लक्षण दिख सकते हैं, आइए जानते हैं। [ये भी पढ़ें: अपने अंदर के आलोचक पर कैसे जीत पाएं]

फ्लैट इफेक्ट के लक्षण: फ्लैट इफेक्ट से पीड़ित व्यक्ति में निम्न लक्षण दिखाई देते हैं

  • चेहरे पर कोई भाव या अभिव्यक्ति नहीं होना
  • वर्बल या नॉनवर्बल तरीके से बात करते वक्त भावनात्मक प्रतिक्रियाएं ना होना
  • उदासीनता होना
  • उनकी आवाज में नीरसता रहती है
  • दूसरों के साथ आई कॉन्टेक्ट बनाने से बचना
  • चेहरे के भावों में कोई परिवर्तन नहीं होना

फ्लैट इफेक्ट के कारण: फ्लैट इफेक्ट असामान्य मस्तिष्क गतिविधि के कारण हो सकता है। विशेष रूप से दिमाग के उस क्षेत्र में असामान्य गतिविधियां होती है जो कि आमतौर पर उत्तेजना के लिए ज़िम्मेदार होता है। फ्लैट इफेक्ट से ग्रसित लोगों के दिमाग का यह हिस्सा उतना सक्रिय नहीं होता जितना कि उन लोगों का होता है जो इस अवस्ठा का अनुभव नहीं कर रहे हैं। इस अवस्था से गुज़र रहे लोगों के दिमाग और शरीर को इमोशन्स को फिजिकल एक्शन में परिवर्तित करने में मुश्किल होती है। [ये भी पढ़ें: कहीं भी कभी भी कैसे लें पावर नैप]

हालांकि ऐसा नहीं है कि जिन लोगों में फ्लैट इफेक्ट के संकेत दिख रहे हैं वो जज़्बातों का अनुभव नहीं करते हैं। फ्लैट इफेक्ट से पीड़ित कुछ व्यक्तियों ने कहा है कि वो इमोशन्स को महसूस तो करते हैं लेकिन वो इन्हें अपनी बातों और कामों में अभिव्यक्त नहीं कर पाते हैं।

कैसे होता है फ्लैट इफेक्ट का इलाज: इस समस्या के उपचार के लिए दो तरीके हैं- पहले तरीके के दौरान पीड़ित व्यक्ति में समस्या के कारणों का पता लगाया जाता है और फिर मेडिकेशन, थेरेपी और दोनों के कॉम्बिनेशन के जरिए इसके लक्षणओं को कम करने की कोशिश की जाती है।

दूसरे तरीके के जरिए फ्लैट इफेक्ट से ग्रस्त व्यक्ति को भावनात्मक प्रतिक्रियाएं देना सिखाया जाता है क्योंकि वो प्राकृतिक तरीके से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में असमर्थ होते हैं। [ये भी पढ़ें: इन लक्षणों से करें डिमेंशिया की पहचान]

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