डिप्रेशन से हो सकता है बाइपोलर डिसऑर्डर

what are the symptoms and types of bipolar disorder

मानसिक रूप से अस्वस्थ होने पर व्यक्ति में कई तरह के मानसिक विकार उत्पन्न होने लगते हैं। विश्व स्वास्थ संगठन के मुताबिक हर चार में से एक व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार से पीड़ित हैं। इन्हीं मानसिक विकारों में से एक है ‘बाइपोलर’ डिसऑर्डर। यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति का मूड बहुत जल्दी मेनिया से डिप्रेशन में बदल जाता है। मेनिया वह स्थिति है जब व्यक्ति बहुत ही सकारात्मक होता है और डिप्रेशन में व्यक्ति भवनात्मक स्तर पर उदास हो जाता है। इस तरह के विकार उत्पन्न होने पर व्यक्ति को कई तरह की परेशानियां होने लगती हैं। [ये भी पढ़ें: घना अंधेरा पैदा करता है न्यक्टोफोबिया जैसा मनोविकार

बाइपोलर डिसऑर्डर 1: इस तरह के बाइपोलर डिसऑर्डर में व्यक्ति के भीतर कभी-कभी मेनिया के लक्षण देखने को मिलते है। ऐसे लोगों को चार दिन में एक बार हाइपोमेनिया की शिकायत होती है।

बाइपोलर डिसऑर्डर 2: बाइपोलर डिसऑर्डर के इस प्रकार में व्यक्ति को लगभग दो सप्ताह में कम से कम एक बार मेजर डिप्रेशन के लक्षण देखने को मिलते हैं। इसमें भी बाइपोलर डिसऑर्डर 1 की तरह चार दिन में एक बार हाईपोमेनिया होने की संभावना होती है। [ये भी पढ़ें: इन कारणों से हो सकती है मानसिक अस्वस्थता]

साइक्लोथैमिया: इस तरह के मानसिक विकार उत्पन्न होने पर व्यक्ति को हाईपोमेनिया और मेजर डिप्रेशन जैसी समस्या उत्पन्न होने लगती है। इसके लक्षण बहुत कम दिखाई देते है। इससे पीड़ित व्यक्ति को महीने में एक या दो बार इस तरह की अवस्था देखने को मिलती है।

बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण:
what are the symptoms and types of bipolar disorderबाइपोलर डिसऑर्डर से ग्रसित व्यक्ति में जब मेनिया की अवस्था होती है उस समय वह बहुत ज्यादा उत्साहित हो जाना, किसी भी काम के प्रति के बहुत उतेजित हो जाना। बाइपोलर डिसऑर्डर होने पर व्यक्ति में इस तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं।

  • काफी ज्यादा खुश होना।
  • बहुत ज्यादा मौज-मस्ती करना।
  • बिना किसी सुरक्षा के यौन सम्बन्ध स्थापित कर लेना।
  • काफी मात्रा में दवाइयों का सेवन करना।

बाइपोलर डिसऑर्डर की दूसरी अवस्था में व्यक्ति बहुत ज्यादा उदास रहने लगता है। वह भावनात्मक रूप से बहुत ज्यादा उदास महसूस करता है। इस अवस्था को इन लक्षणों के माध्यम से पहचाना जा सकता है।

  • बहुत ज्यादा अवसाद में डूब जाना।
  • हर तरह की आशा को खो बैठना।
  • ऊर्जा की कमी हो जाना।
  • किसी भी काम में रूचि नहीं लेना।
  • बहुत ज्यादा नींद आना।
  • आत्महत्या के ख्याल मन में आना।

बाइपोलर डिसऑर्डर को ठीक करने के उपचार: बाइपोलर डिसऑर्डर को ठीक करने के लिए बहुत से उपचार का प्रयोग किया है। जिसके अंतर्गत दवाइयां, लाइफ स्टाइल में बदलाव लाना, काउंसलिंग जैसी विधि का सहारा लिया जाता है।

कॉगनिटिव बिहेवियरल थेरेपी: कॉगनिटिव थेरेपी मनोचिकित्सा का ही एक प्रकार है जिसमें व्यक्ति के सोचने समझने की क्षमता, व्यवहार में लाने के लिए अलग-अलग तरह से थेरेपी का सहारा लिया जाता है। इसमें व्यक्ति के आस-पास के वातावरण में खासा बदलाव किया जाता है।

इंटरपर्सलन और सोशल रिदम थरेपी: इंटरपर्सलन और सोशल रिदम थरेपी में व्यक्ति का सारा ध्यान उसकी दिनचर्या पर केन्द्रित किया जाता है। जिसमें सोना, भोजन करना आदि शामिल हो सकते हैं। इसके तहत दिन के हर कार्यों में संतुलन लाया जाता है।
इसके साथ निम्नलिखित विकल्प होते है-

  • इलेक्ट्रोकोनिवल्ज़िव थेरेपी
  • सप्लीमेंट
  • एक्यूपंक्चर

जीवन शैली में बदलाव:
बाइपोलर डिसऑर्डर के उपचार के लिए यह पद्धति काफी अहम होती है इसके अंतर्गत ये बाते शामिल होती हैं –

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