जानें कैसे अत्यधिक सेल्फी लेना मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है

आज के दौर में सेल्फी लेना एक नया चलन है। ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है जिनके पास डुअल कैमरे वाला मोबाइल हो और उन्होंने सेल्फ न खींची हो। सेल्फी खींचना सामान्य है। जीवन के कुछ ख़ास पलों को यादगार बनाने के लिए सेल्फी खींचना सामान्य सी बात है पर जब सेल्फी का क्रेज इतना ज्यादा हो जाये की इससे व्यक्ति खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाने लगे तब सेल्फी खींचना सामान्य नहीं रह जाता। अत्यधिक सेल्फी खींचना कई तरह के मानसिक विकारों का संकेत हो सकता है। आईये जानते हैं अत्यधिक सेल्फी लेना किस तरह आपके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। [ये भी पढ़ें: जरूरत से ज्यादा झूठ बोलना है कम्पल्सिव लाइंग डिसऑर्डर]

1. असुरक्षा की भावना और आत्म विश्वास की कमी: एक अमेरिकी क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट लूसी हेम्मेन के अनुसार मानसिक रूप से मजबूत इंसान सेल्फी खींचता भी है तो उसे एडिट नहीं करता या फोटो पर ज्यादा फोटो फ़िल्टर नहीं लगाता है और सेल्फी भी बहुत कम ही खींचता है। वहीं वो लोग जो एक अच्छी सेल्फी के लिए 20-30 सेल्फी खींचते है तथा एडिट करते हैं उनमे असुरक्षा की भावना होती है तथा ऐसे लोगों में आत्मविश्वास की कमी होती है।

2. कमजोर रिश्ते: यूरोप के तीन एमबीए कॉलेज में हुए टैगर्स डिलाइट नामक एक सर्वे में यह पाया गया कि वो लोग जो बहुत ही ज्यादा सेल्फी लेते हैं और सोशल मीडिया साइट्स पर पोस्ट करते हैं उनका अपने दोस्तों, सहकर्मियों या पार्टनर से रिश्ता ज्यादा मजबूत नहीं होता। ऐसे लोग खुद को अन्दर से अकेला महसूस करते हैं। [ये भी पढ़ें: जानें ओब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर के कारण, लक्षण और उपचार]

3. सेल्फ ओबसेशन (आत्म-ग्रस्त): वो लोग जो बहुत ज्यादा सेल्फी खींचते हैं उनमे सेल्फ ओबसेशन की भावना होती है। ये भावना आगे जाकर नर्सिस्सिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर जैसे मानसिक विकार हो जाती है। इस मानसिक विकार में व्यक्ति खुद को महत्त्व देने लगता है तथा उसमे खुद को सबसे सर्वश्रेष्ठ और सुन्दर समझने की भावना उत्पन्न होने लगती है। ज्यादा सेल्फी खींचने वाले लोगों में भी खुद को सुन्दर दिखाने तथा अपने चेहरे के सौन्दर्य से प्रभावित होने के भावना उत्पन्न होने लगती है जो बाद में एक मानसिक विकार का रूप ले लेती है।

4. मनोबल कम होता है: कैमरे की मदद से या कई तरह के फोटो एडिटिंग टूल की मदद से ऐसी सेल्फी खींची जाती है जो चेहरे को वास्तविकता की तुलना में ज्यादा आकर्षक और सुन्दर तस्वीरें तैयार करती है। आजकल के ट्रेंड में कई ऐसे मोबाइल एप्लीकेशन है जो सेल्फी को और ज्यादा सुन्दर बनाते हैं। लोग जब इन तरीकों से सेल्फी खींच कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स डालते हैं तो उन लोगों के प्रति बाकी लोगो में ये भावना आती है कि व्यक्ति काफी सुन्दर है पर जब असलियत में लोग ऐसे लोगों से मिलते हैं तो पाते हैं की व्यक्ति उतना भी सुन्दर नहीं जितना अपने सेल्फिज में लगता है। ऐसे स्थिति में कई बार सेल्फिज लेने वाले लोगों का मनोबल टूटता है। सेल्फिज की वजह से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तारीफ़ सुनने की आदत रखने वाले लोग जब असल जिंदगी में अपनी तारीफ़ नहीं सुन पाते तो उनमे इन्फीरियरीटी कॉम्पलैक्स जैसी समस्या उत्पन्न होते है और उनका मनोबल कम होता है। [ये भी पढ़ें: बहुत ज्यादा आक्रामक होना है बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर]

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