लक्षण जो करते हैं स्किज़ोफ्रेनिया की ओर इशारा

symptoms of schizophrenia

स्किज़ोफ्रेनिया मानसिक विकार का ही एक रूप है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व भर में एक प्रतिशत लोगों में इस तरह का मानसिक विकार पाया जाता है। यह संख्या आंकड़ों के हिसाब से कम जरुर है लेकिन असल में यह तेजी से बढ़ता हुआ एक मानसिक विकार है। इस तरह के मानसिक विकार से पीड़ित व्यक्ति खुद को समाज और परिवार से अलग कर देता है और अपना समय अकेले में बिताना ज्यादा पसंद करता है। जिसकी वजह से यह विकार और ज्यादा घातक होने लगता है। स्किज़ोफ्रेनिया उन मानसिक विकारों में से एक है जिनका उपचार करना संभव हैं लेकिन इसके लिए इसके बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है। आइए स्किज़ोफ्रेनिया के बारे में जानते हैं।

स्किज़ोफ्रेनिया क्या है?
इस तरह के मानसिक विकार उत्पन्न होने पर व्यक्ति अपनी एक काल्पनिक दुनिया में रहने लगता है। उसे तरह-तरह की आवाजों का आभास होता है जो उसके अलावा किसी और को सुनाई नहीं देती हैं। इसके साथ-साथ पीड़ित व्यक्ति को ऐसा लगने लगता है कि उसके मन-मस्तिष्क को कोई अन्य व्यक्ति नियंत्रित कर रहा है। इस तरह की परिस्थितियों के कारण व्यक्ति बहुत ज्यादा डर कर रहने लगता है और उसमें कुछ अनियमित व्यवहार जन्म लेने लगते है। [ये भी पढ़ें : इन वजहों का परिणाम हो सकता है बच्चे का दुर्व्यवहार]

स्किज़ोफ्रेनिया के लक्षण:
स्किज़ोफ्रेनिया जैसे मानसिक विकार उत्पन्न होने पर व्यक्ति बहुत ज्यादा डरा-डरा सा रहता है। अपने दैनिक कार्यों को ठीक ढंग से नहीं कर पाता है। इसके साथ-साथ वह अपने जीवन का आनंद नहीं उठा पाता है। इन सबके अलावा इसके गंभीर लक्षण इस प्रकार हैं-

*मति भ्रम हो जाना:
मति भ्रम होने से तात्पर्य है कि ऐसे में व्यक्ति का मस्तिष्क एक भ्रम में रहता है। एक काल्पनिक दुनिया में रहने लगता है जिसमें उसे अलग-अलग तस्वीरें दिखने लगना, अलग-अलग तरह की आवाजें सुनाई देना आदि लक्षण दिखते हैं।

*हमेशा दूसरों के प्रति भ्रम में रहना:
स्किज़ोफ्रेनिया में पीड़ित व्यक्ति अपने आस-पास के लोगों पर बहुत ज्यादा शक करने लगता है। उसे यह लगता है हर कोई उसके बारें में साजिश कर रहा है। वह व्यक्ति जल्दी किसी पर भरोसा नहीं कर पाता है। [ये भी पढ़ें: पैनिक डिसऑर्डर का लक्षण हो सकती है बहुत ज्यादा घबराहट]

*क्या कहना है इस बात को लेकर कंफ्यूज रहना:
इस तरह के मानसिक विकार के दौरान पीड़ित इस बात को लेकर हमेशा कंफ्यूज रहता है कि उसे क्या कहना है। वह जब सामने वाले किसी इंसान से बात कर रहा होता है तो उस समय पर क्या उत्तर देना है, इस बात को लेकर बहुत ज्यादा सोचने लगना इस विकार को दर्शाता है।

* एक जगह पर ध्यान न लगा पाना:
इस मानसिक रोग के दौरान व्यक्ति किसी एक काम में ध्यान नहीं लगा पाता है। फिर वह चाहे टीवी ही क्यों न देख रहा हो। वह एक जगह पर थोड़े समय के लिए ठहर नहीं पाता है। कार्यस्थल, स्कूल या अन्य किसी भी जगह पर एकाग्रता के साथ समय नहीं बिता पाता है।

यह व्यक्ति के विचारों पर कैसे प्रभाव डालता है?
जो लोग इस तरह के मानसिक विकारों से पीड़ित होते हैं उन्हें किसी विषय पर सोचने में बहुत ज्यादा मुश्किल होती है। वह किसी भी चीज पर अपने विचार उत्पन्न नहीं कर पाते हैं और अगर वह अपने विचार रखते भी हैं तो वो किसी भी प्रकार से तार्किक नहीं होते हैं या फिर उस विषय से उन विचारों का कोई संबंध नहीं होता है। कई बार ऐसे में व्यक्ति के भीतर भावनाएं उत्पन्न नहीं हो पाती है या वह अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाता है।

किन लोगों में इस तरह के मानसिक विकार उत्पन्न होने की संभावना रहती है:
इस तरह का मानसिक विकार स्त्री और पुरुष दोनों में एक सामान रूप से पाया जाता है। खास बात यह है कि पुरुषों में इस तरह का विकार जल्दी उत्पन्न होता है और महिलाओं में यह उम्र के अनुसार ज्यादा समय में होता है। इस तरह का विकार 16 से 30 की उम्र के बीच के लोगों में अधिकतर देखने को मिलता है। इसके साथ ही बच्चों में और 45 वर्ष की आयु के बाद के लोगों में बहुत कम देखने को मिलता है।

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