नई चीजों का जुनून दिमाग पर हो सकता है हावी

obsession for new things can burden your brain

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हम में से अधिकतर लोगों का ये स्वभाव होता है कि हम नई चीजों की तरफ आकर्षित होते हैं और उन्हें जितना जल्दी हो सके प्राप्त करना चाहते हैं। चाहे फिर नई जानकारी हो, कोई उत्पाद या सेवा हम उसे प्राप्त करने के लिए हर मुमकिन प्रयास करते हैं। नई चीजें हमारे दिमाग को अपनी ओर खींचती है, हम नई तकनीक सीखना चाहते हैं, फोन के नए फीचर्स सीखना चाहते हैं, हर रोज ऑनलाइन ढ़ेरों सूचनाएं, किताबें और ना जाने क्या-क्या। आपका ब्रेन इतनी चीजों को प्रोसेस तो कर लेता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इससे आपके दिमाग पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। हर नई चीज को लेकर आपका जुनून आपके दिमाग को कार्य क्षमता को प्रभावित कर सकता है। आइए जानते हैं कि कैसे नई चीजों का जुनून दिमाग पर हो सकता है हावी। [ये भी पढ़ें: परेशानियों के होते हुए भी ख़ुद को प्रोत्साहित कैसे करें]

नई चीजों का जुनून क्यों होता है
इंटरनेट की वजह से आपको एक क्लिक पर हर चीज की जानकारी मिल जाती है। हालांकि इससे आपको अपने काम की सूचना तो मिलती ही है साथ ही फालतू सूचनाएं भी मिलती है। इसे इन्फर्मेशन ओवरलोडिंग भी कहते हैं। ऐसा ही बाकी चीजों के साथ होता है।

विज्ञापन कंपनी अपने प्रोडक्ट्स या सर्विस को बेचने के लिए हमारी इसी आदत का फायदा उठाती है। आपने देखा भी होगा कि जब भी आप अपना ईमेल खोलते हैं तो उसमें ढ़ेरों ईमेल प्रमोशन और विज्ञापन के होते हैं, जिनसे कहीं ना कहीं हम प्रभावित हो जाते हैं। इसके अलावा सेलेब्रिटी या किसी मशहूर व्यक्ति द्वारा किए जा रहे विज्ञापन भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। एक वक्त में जरुरत से ज्यादा चीजों को हैंडल करने के लिए हम अपने ब्रेन पर दबाव बनाते हैं जिसके कारण दिमाग की प्रोसेसिंग एबिलिटी धीमी हो सकती है। [ये भी पढ़ें: सफलता और आत्म रक्षा के बीच कैसे बनाएं संतुलन]

यह जुनून कब थकावट बन जाता है
इंटरनेट उपयोगी है, लेकिन इसका नकारात्मक पक्ष यह है कि इससे हमें ढ़ेरो विकल्प मिलते हैं और अत्यधिक जानकारी। अक्सर यह जानकारी झूठ और गलत होती है। इसके अलावा अगर प्रोडक्ट की बात करें तो आप किसी भी शॉपिंग साइट को देख सकते हैं। थोड़ी देर एक्स्प्लोर करने के बाद जब आप पाते हैं कि उस पर आपके लिए कुछ अच्छा नहीं है तो आप उसे बंद कर देते हैं। इससे ये होता है किसी एक नई चीज का जुनून आपको एक समय तक रहता है और फिर आपको दूसरी चीज चाहिए होती है।

दिमाग के पास सीमित स्पेस और उर्जा है
हमारा दिमाग हर चीज को प्रोसेस तो करता है लेकिन यह भी सच है कि दिमाग के पास सीमित स्थान और ऊर्जा है और बहुत अधिक नई चीजों के कारण यह उर्जा और स्पेस व्यर्थ ही खर्च होता है। जब अधिकतर नई सूचनाएं बेकार होती हैं तो इस कारण हमारे दिमाग के पास अच्छी जानकारियों को प्रोसेस करने के लिए कम ही स्पेस बचता है। [ये भी पढ़ें: जब कोई व्यक्ति आपसे बहस करें तो आपको क्या करना चाहिए]

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