नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर के कारण, लक्षण और उपचार

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Narcissistic Personality Disorder: Causes, Symptoms & Treatment

नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर एक प्रकार का पर्सनालिटी डिसऑर्डर है, जो व्यक्ति के भीतर जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास भर देता है। इस तरह के मानसिक विकार का सीधा सम्बन्ध व्यक्ति के व्यव्हार से होता और उसके सोचने-समझने की क्षमता पर निर्भर करता है, जिसके कारण व्यक्ति खुद को बाकियों से सबसे अच्छा और खास मानने लगता है। आइए जानते हैं इस तरह के मानसिक विकार से जुड़ी अन्य बातों के बारे में। [ये पढ़ें: एंग्जायटी से उबरने के लिए इन आसान से उपायों का लें सहारा]

नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर होने का कारण:
बहुत से ऐसे मानसिक विकार है जो व्यक्ति के व्यवहार और विचार पर नियंत्रण न होने की वजह से होने लगता है। नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर भी उन्हीं में से एक है, इस तरह के विकारों से संबंधित एक अहम बात यह है कि यह किन कारणों से होता है इसके बारे में ठीक तरह से नहीं पता लगाया जा सकता है। लेकिन फिर भी इसके पीछे जो कारण अब तक मनोचिकत्सक मानते हैं उनमें प्रमुख रूप से अनुवांशिकता, जीवन में घटित घटनाओं के अनुभव और व्यक्ति के आस-पास का माहौल भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त बचपन में हुए दुर्व्यवहार के कारण, माता-पिता द्वारा बच्चे को जरूरत से ज्यादा लाड़ देना आदि हो सकते हैं।

नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर के लक्षण:
इस तरह के मानसिक विकार की पहचान व्यस्क होने के उपरांत ही हो पाती है उससे पहले इसको पहचान पाना मुश्किल होता है। इसकी पहचान करने के लिए कुछ लक्षण दिखाई देते हैं जो इस प्रकार है-

  • खुद को बहुत ज्यादा महत्व देना।
  • खुद को लेकर इस कल्पना में रहना कि वह सबसे सुन्दर है, बहुत ज्यादा बुद्धिमान है, शक्तिशाली है, समझदार।
  • बाकियों को खुद के मुकाबले नीचे समझना।
  • अपने तरीके से काम न होने पर व्यक्ति बहुत ज्यादा उदास, गुस्सा और संशय में रहने लगता है।
  • लोगों का ध्यान हमेशा अपनी तरफ खींचने की कोशिश करता है। [ये पढ़ें: अलग-अलग तरह के होते हैं पर्सनालिटी डिसऑर्डर, जानें कुछ प्रमुख प्रकार

नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर को कैसे जांचें:
सबसे पहले तो यह कि इस तरह के मानसिक विकार की पहचान करने में काफी समय लगता है। इसलिए इसके लक्षणों की पुष्टि होने पर इसके जांच के लिए मनोचिकत्सक व्यक्ति का शारीरिक और मानसिक परिक्षण करता है। जिसमें व्यक्ति की बीती जिन्दगी के बारे में जाना जाता है और इसके आधार पर ही व्यक्ति में इस तरह का मानसिक विकार है या नहीं इसकी पुष्टि की जाती है।

नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर का उपचार:
इस तरह के मानसिक विकार का उपचार करना थोड़ा मुश्किल होता है क्योंकि इस तरह के विकार के बारे में पीड़ित व्यक्ति को यकीन दिलाने में बहुत ज्यादा दिक्कत होती है। इसलिए इस तरह के मानसिक विकार के उपचार व्यक्तिगत साइको थेरेपी या फिर समूह आधारित साइको थेरेपी किया जाता है। इसके साथ-साथ इसमें ट्रान्सफरेन्स केन्द्रित थेरेपी और स्कीमा केन्द्रित साइको थेरेपी का सहारा लिया जाता है। [ये भी पढ़े-जानिए किस तरह से सोशल मीडिया करती हैं किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित]

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