हद से ज्यादा डरने का कारण कहीं फोबिया तो नहीं

know about different types of phobia

डर हमारे नर्वस सिस्टम में होने वाले बदलाव के कारण देखने को मिलता है। इसे हम सीधे तौर पर मस्तिष्क में रासायनिक बदलावों के कारण होने वाले व्यवहार में होने वाले परिवर्तन के रूप में समझ सकते है। हर व्यक्ति में किसी ना किसी तरह का डर जरूर होता है। मगर जब यह डर जरूरत से ज्यादा होने लगता है, तब यह एक मानसिक विकार के रूप में तब्दील हो जाता हैं। वैज्ञानिक भाषा में इसे ‘फोबिया’ कहते हैं। इस तरह की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को एक सामान्य व्यक्ति से ज्यादा डर लगने की आदत हो जाती है।

फोबिया होने के कारण:
अनुवांशिक और परिस्थितियों की वजह से फोबिया हो सकता है जो बच्चे एंग्जायटी डिसऑर्डर जैसे मानसिक विकार से जूझ रहे होते हैं तो समय के साथ-साथ उन बच्चों में फोबिया होने का खतरा ज्यादा पाया जाता है। किसी खास तरह की परिस्थिति में होने वाली परेशानी के कारण भी फोबिया होने की संभावना होती है। इसके अलावा कई बार लम्बे समय तक बीमार रहने के कारण भी फोबिया होने का ख़तरा रहता है। जिन लोगों को ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी होती है उनमें भी फोबिया जैसे मानसिक विकार उत्पन्न हो सकते हैं।

फोबिया के लक्षण:
फोबिया के काफी सारे लक्षण पाए जाते हैं जिनकी पुष्टि होने पर आसानी से फोबिया होने का पता लगाया जा सकता है। कुछ सामान्य लक्षण नीचे दिए गए हैं जो फोबिया से पीड़ित व्यक्ति में देखने को मिलते हैं।
* दिल की धड़कन का बहुत तेज हो जाना।
* सांस लेने में दिक्कत होना।
* तेज बोलने में असमर्थ होना या बोल न पाना।
* मुंह सूखना।
* पेट की समस्या उत्पन्न होना।
* हाई ब्लड प्रेशर की समस्या उत्पन्न होना।
* हाथ पैरों का कांपना।
* सीने में दर्द या घबराहट होना।
* चक्कर आना या हल्कापन महसूस होना।
* बहुत ज्यादा पसीना आना।

फोबिया के प्रकार:
अमेरिकन साईकेट्रिक एसोसिएशन के अनुसार लगभग 100 तरह के फोबिया होते हैं जिसमें से नीचे वो फोबिया दिए गए हैं जो ज्यादातर लोगों में पाए जाते हैं।

एगोरोफोबिया:
इस तरह के फोबिया होने पर व्यक्ति को बाहर भीड़ वाली जगहों पर जाने में बहुत ज्यादा डर लगता है। जिसकी वजह से व्यक्ति घर से बाहर या भीड़-भाड़ वाली जगहों पर नहीं जाना चाहता। [ ये भी पढ़ें :  खाने के बहुत ज्यादा शौकीन है तो आपको हो सकता है फ़ूड एडिक्शन]

सोशल फोबिया:
इस तरह के फोबिया को सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर भी कहा जाता है जिसमें व्यक्ति को लोगों से मिलने में, समूह में रहने, उनके बीच में अपनी बात रखने आदि स्थितियों में बहुत ज्यादा डर लगता है। वह डर इतना ज्यादा होता है कि व्यक्ति एक कमरे तक भी सीमित रहने लगता है। उसे अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने में बहुत तकलीफ होती है।

ग्लोसोफोबिया:
इस तरह के फोबिया होने पर व्यक्ति ऑडियंस के सामने अपनी बातों को अभिव्यक्त नहीं कर पाता है। इस तरह का फोबिया होने पर व्यक्ति के शारीरिक हाव-भाव किसी भी समूह के समक्ष जाने पर बदलने लगते हैं। [ये भी पढ़ें: सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर कर सकता है आपको दोस्तों से दूर]

एक्रोफोबिया:
यह फोबिया अधिकतर लोगों में पाया जाता है। इसमें व्यक्ति को किसी भी ऊंचाई वाले स्थान जैसे कि किसी पहाड़, ब्रिज या फिर किसी बहुमंजिला इमारत पर जाने में बहुत ज्यादा डर और घबराहट होती है। जिसके कारण काफी ज्यादा पसीना आना एक सामान्य सी बात है।

हीमोफोबिया:
इस फोबिया में व्यक्ति को खून या फिर किसी प्रकार की चोट के कारण बेहोशी होने लगती है। फिर वह उस व्यक्ति के साथ हो या किसी अन्य के साथ उसे घबराहट और चक्कर आने लगते हैं।

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