कन्या पूजन 2017: एक सवाल-कन्या पूजन का दिखावा या महिलाओं का सम्मान, क्या है जरुरी

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नवरात्रि के त्यौहार में नवमी के दिन आखिरी व्रत किया जाता है। इस दिन सभी लोग अपने घरों में छोटी-छोटी कन्याओं के लिए विशेष भोज का आयोजन करते हैं। इसे अनुष्ठान को कन्या पूजन कहा जाता है। हिंदू धर्म में कन्या यानि छोटी लड़की को देवी का रुप माना जाता है क्योंकि वो सबसे शुद्ध होती हैं और इसीलिए उनकी पूजा की जाती है। जितना सम्मान लोग छोटी उम्र में कन्या पूजन के जरिए लोगों को देते है, बड़े होने के बाद लोगों की मानसिकता महिला को लेकर उतनी ही बदल जाती है। वो बच्चियां लोगों के झूठ, हथकंडों और पापों से अनजान होती हैं जो सोचती हैं कि लोग उन्हें देवी समझते हैं। हम उस देश में रह रहे हैं जहां महिलाओं को अपनी सुरक्षा से लेकर शिक्षा तक ना जाने कितनी समस्याओं से जूझना पड़ता है। महिलाओं पर हो रहे अत्याचार कन्या पूजन की मान्यताओं के बिल्कुल विपरीत हैं। एक सवाल ऐसा क्यों है। महिलाओं को लेकर लोगों की मानसिकता दोहरी क्यों है। [ये भी पढ़ें: डर से क्यों डरना जब आप आजमां सकते हैं आसान तकनीक

कन्या पूजन क्यों होता है
नवरात्रि के आखिरी दिन सभी लोग दुर्गा पूजा और व्रत के समापन के लिए कन्या पूजन करते हैं। इस अनुष्ठान के जरिए नौ दिन व्रत करने वाले लोग कन्याओं को देवी दुर्गा का प्रतिबिंब मानकर उनकी पूजा करते हैं और अपना व्रत खोलते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे भक्तों को सुख समृद्धि का वरदान मिलता है। कन्या पूजन के द्वारा लोग देवी दुर्गा को प्रसन्न करके अपने हित को पूरा करते हैं और धन-धान्‍य की प्राप्ति के लिए वर मांगते हैं।

लोगों की विकृत मानसिकता
kanya pujan 2017 what is more important kanya pujan or women's respectजो लोग एक ओर मां का स्वरुप मानकर लड़की को छोटी उम्र में पूजते हैं और अत्यधिक सम्मान और स्नेह देते हैं वही लोग दूसरी ओर महिलाओं के लिए विकृत मानसकिता रखते हैं। साल 2014 में आई कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट इनिसिएटिव की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में प्रति 30 मिनट एक महिला बलात्कार या दुष्कर्म का शिकार होती है। लोग मां दुर्गा जो कि स्वयं एक महिला हैं और अनश्वर हैं, उन्हें श्रद्धा और भावना अर्पित करते हैं फिर भी हर दिन वही लोग महिला को थोड़ा-थोड़ा नष्ट करना चाहते हैं। लोगों की ये मानसिकता समझ के परे है। [ये भी पढ़ें: नवरात्र स्पेशल: देवी महाकाली से सीखें कैसे क्रोध को बनाएं अपनी ताकत

कन्या पूजन का दिखावा या महिलाओं का सम्मान
असल में कन्या पूजन का महत्व महिलाओं के अस्तित्व को समझाने और उनकी ताकत को दर्शाने से है। हमारी संस्कृति से कन्या पूजन इसलिए जुड़ा है, क्योंकि हमारी संस्कृति महिलाओं को देवी का दर्जा देती है और उनके साथ किसी भी तरहा का बुरा बर्ताव स्वयं देवी मां के सम्मान को ठेस पहुंचाने जैसा है। अब फैसला आपका है कि आप क्या करना चाहते हैं।

आपसे एक सवाल
क्या आप समाज को बदलना चाहते हैं? तो शुरुआत खुद से करें। यह जानना और समझना बहुत ही आवश्यक है कि यदि आप नवरात्रि के दौरान लड़कियों को देवी का दर्जा देते हैं, तो अन्य दिनों में भी महिलाओं को वही सम्मान क्यों नहीं मिल सकता। यह ध्यान रखें कि बदलाव एक व्यक्ति से ही शुरू होता है। इसलिए, इस नवरात्रि के समापन के साथ महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार और उनके अपमान को भी समाप्त कर दें। [ये भी पढ़ें: प्रकृति के बीच रहकर कैसे दूर करें अपनी चिंता]

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