जानें हाइपोमेनिया के बारे में जिसमें व्यक्ति बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाता है

hypomanias causes symptoms and prevention

हाइपोमेनिया एक प्रकार से मेनिया का मिल्डर फॉर्म है। मेनिया वह परिस्थिति है जब व्यक्ति बहुत ज्यादा ऊर्जावान महसूस करने लगता है। जो कि मूड डिस्टर्बेंस के कारण होता है जिसमें व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से ऊर्जा से भर जाता है। हाइपोमेनिया उसी के बीच की एक स्थिति होती है जिसमें व्यक्ति के ऊर्जा का स्तर सामान्य से ज्यादा होता है और वह लगातार बहुत ज्यादा काम करने लगता है। आइए जानते हैं हाइपोमेनिया से जुड़ी अन्य बातों के बारे में। [ये भी पढ़ें- आलस के भी है अपने फायदे, जानकर हो जाएंगें हैरान आप]

हाइपोमेनिया के कारण:
इस तरह के मानसिक विकार के पीछे कई तरह के कारण होते हैं जो इस प्रकार हैं:-

  • किसी पारिवारिक या फिर जीवन में होने बदलाव के कारण होने वाला तनाव।
  • शराब या फिर दवाओं की लत लग जाना।
  • नींद पूरी न होना या फिर रातों को नींद न आना।
  • लंबे समय तक दवाओं का सेवन करना।
  • ज्यादा समय तक शारीरिक रूप से बीमार रहना।

हाइपोमेनिया के लक्षण:

  • एकदम से शारीरिक ऊर्जा के स्तर में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी के साथ सामान्य सी परिस्थिति में आ जाना।
  • बिना रुके ज्यादा से ज्यादा समय तक काम करना, इसके साथ-साथ एक स्थान पर टिक कर नहीं बैठ पाना।
  • नींद में कमी होने लगना।
  • बहुत ज्यादा आत्मविश्वास का बढ़ जाना।
  • काफी ज्यादा बातें करना।
  • मन में बहुत ज्यादा कामुकता की भावनाओं का उत्पन्न होना।
  • काफी जल्दी किसी बात से तंग आ जाना या फिर गुस्सा आ जाना। [ये भी पढ़ें- संकेत जो बताते हैं कि आप बिना जाने अपने जीवन को बर्बाद कर रहे हैं]

हाइपोमेनिया की जांच:
यदि आपने पहले कभी इस तरह के विकार का सामना नहीं किया है और ऊपर दिए लक्षणों को महसूस करते हैं। मनोचिकित्सक आपकी मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर इस मानसिक विकार की जांच करेंगे। यदि आपमें हाइपोमेनिया से सम्बंधित कोई चार लक्षण भी नजर आते हैं। तो चिकित्सक इस तरह के मानसिक विकार होने की पुष्टि कर सकता है।

हाइपोमेनिया का उपचार:
हाइपोमेनिया जैसे मानसिक विकार उत्पन्न होने पर व्यक्ति के भीतर ऊर्जा का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इसके उपचार के लिए डॉक्टर उन दवाओं की सलाह देते हैं। हाइपोमेनिया में व्यक्ति के सोने का पैटर्न बिगड़ जाता है, इसलिए सोने का एक सही समय निर्धारित करना जरूरी है। एक समय पर सोएं और रोजना एक ही समय पर उठने की कोशिश करें।[ये भी पढ़ें- ज्यादा शक करते है तो हो सकते हैं पैरानॉयड पर्सनालिटी डिसऑर्डर के शिकार]

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