वीडियो गेम खेलने की वजह से बच्चों पर क्या दुष्प्रभाव होता है

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harmful effects of gaming addiction in children

किसी भी चीज को जरूरत से ज्यादा करना हानिकारक होता है। इसी तरह, यदि आपका बच्चा एक पोर्टेबल डिवाइस पर, टीवी पर या किसी कंप्यूटर पर अत्यधिक गेम खेलता है तो यह उनके जीवन को प्रभावित कर सकता है। गेम खेलना बच्चों के लिए मनोरंजन का एक बड़ा स्रोत होता है, लेकिन इसकी लत बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक हो सकती है। वीडियो गेम की लत लगने वाले बच्चे भावनात्मक और शारीरिक दोनों रूप से प्रभावित होते हैं। गेमिंग की लत ना केवल उनके स्वास्थ्य को प्रभावित करती है बल्कि उनकी पढ़ाई को भी प्रभावित करती है। इसके अलावा, जिन बच्चों को वीडियो गेम की लत लगती है वो किसी सामाजिक चीजों में भाग भी नहीं लेते हैं। आइए जानते हैं वीडियो गेम खेलने की वजह से क्या दुष्प्रभाव होते हैं। [ये भी पढ़ें: ब्रेन हैक्स जो आपको स्मार्ट बनाते हैं]

एकाग्रता में कमी:
जिन बच्चों को गेम खेलने की लत होती है वो अपने किसी भी काम या पढ़ाई में एकाग्रता और रूची नहीं ले पाते हैं। अगर बच्चे लंबे समय तक गेम खेलते हैं इससे उनकी पढ़ाई बहुत बुरी तरह से प्रभावित होती है।

नींद की समस्या:
गेम खेलने की लत के कारण लोगों को अच्छी नींद में लेने में समस्या का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, गेम की लत की वजह से बच्चों की नींद आधी रात में खुल जाती है और फिर गेम खेलने की इच्छा होने लगती है। अपर्याप्त नींद समग्र स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। [ये भी पढ़ें: टिप्स जो सोशल एंग्जायटी को दूर करने में मदद करते हैं]

समाज से अलग हो जाना:
जिन बच्चों को गेम खेलने की लत लग जाती है उन्हें हर वक्त बस गेम खेलना ही दिखता है। वो सामाजिक रूप से लोगों से अलग हो जाते हैं और साथ ही वो कोई सोशल इवेन्ट भी अटेंड नहीं करना चाहते हैं। इस वजह से उनका मानसिक स्वास्थ्य पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाता है।

चिड़चिड़ापन:
गेमिंग की लत उनके व्यवहार पर असर डालती है। गेमिंग की लत के कारण बच्चे चिड़चिड़ा हो जाते हैं और उन्हें हर छोटी-छोटी बातों पर भी गुस्सा आने लगता है।

सावधानी:

  • उन्हें परिवार और दोस्तों के साथ अधिक समय बिताने को बोलें।
  • किसी भी कार्य के लिए एक समय सीमा निर्धारित करें और उन्हें गंभीरता से पालन करें।
  • बच्चों को अधिक मोबाइल, लैपटॉप और इंटरनेट का उपयोग करने की अनुमति ना दें और उन पर नज़र रखें।
  • सभी प्रयासों के बावजूद, अगर बच्चे खुद को इन डिजिटल गेम्स से दूर नहीं कर पा रहे हैं तो मनोवैज्ञानिक की मदद लेने में कोई हिचकिचाहट नहीं महसूस करनी चाहिए। [ये भी पढ़ें: संकेत जो बताते हैं कि आप बहुत संवेदनशील व्यक्ति हैं]

 

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