बचपन में ही बच्चे हो सकते हैं इस तरह के मानसिक रोगों के शिकार

different types of mental disorder in childrens

बच्चों में होने वाली मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या आज के समय में गंभीर विचार का विषय बन गई हैं। बचपन में हुई इस तरह की समस्याओं के कारण उन्हें जीवनभर इससे जूझना पड़ सकता है। इंडियन सैकेट्रिक सोसाइटी के अनुसार 186 बच्चों में से 20 बच्चे ऐसे पाए जाते हैं जो मानसिक रूप से विकृत होते हैं या इस तरह की समस्या से जूझ रहे होते हैं। बच्चों में पाए जाने वाले मानसिक विकार की समस्या के पीछे कुछ खास तरह के कारण पाए जाते हैं। जैसे- बच्चों में जन्म से ही मौजूद होना और इसके अलावा इस तरह के मानसिक विकार के पीछे कई बार बहुत ज्यादा अकेलापन, किसी परेशानी से जूझते रहना, पारिवारिक कलह या करियर-पढ़ाई से जुड़ी कोई परेशानी आदि ऐसी समस्याएं होती है। जिनके होने पर उसका सीधा प्रभाव उसके मस्तिष्क पर पड़ता है। इस तरह के मानसिक विकारों की जानकारी रखना बहुत ज्यादा जरुरी है तो आइए जानें बच्चों से जुड़ें मानसिक विकारों के बारें में। [ये भी पढ़ें: मानसिक रोगों को समझने से पहले जानिए उनके प्रकारों के बारे में]

बाइपोलर:
यह दिमाग अस्वस्थ होने के कारण बच्चों में होने वाली बहुत ही घातक समस्या है। जिसके होने पर जल्द से जल्द इसका इलाज जरुरी होता है वरना इसका असर दिमाग पर बहुत तेजी से होने लगता है। इसके होने पर बच्चा बहुत ज्यादा हंसता है, बहुत अधिक खुश होता है, बहुत जल्दी गुस्सा आने लगता है, बहुत तेजी से बोलने लगता है, सोने में दिक्कत होती है मगर बच्चे को इसके कारण थकान महसूस नहीं होता है। इसमें बच्चा बहुत अधिक सेक्स सम्बंधित बातों के बारें में सोचता है, साथ ही किसी भी काम को पूरी तरह नहीं कर पाता है। इसके होने के पीछे प्रमुख कारण है- बच्चे के साथ बचपन में कुछ गलत हुआ हो या बच्चा यौन उत्पीड़न का शिकार हुआ हो, गलती से शराब और दवाओं की लत लग जाने से भी इस तरह के मानसिक विकार उत्पन्न होने लगते हैं।

लर्निंग और कम्युनिकेशन डिसऑर्डर:
यह भी एक प्रकार से बच्चे के मानसिक रूप से स्वस्थ न रहने का कारण होने लगता है। इसमें बच्चों को पढ़ने, लिखने और लोगों से बात करने में परेशानी होती है। जो कुछ भी बच्चा पढ़ता है उसको याद करने में भी उसको दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वह बहुत कम बोलता है और जो भी पढ़ाई करता है वो उसे याद नहीं रहता है। इसके साथ-साथ किसी के साथ बात करते समय वह सामने वाले के प्रश्न का उत्तर न देकर उन्हीं की कही बातों को दोहराता है। इसके अलावा बच्चे को पढ़ते समय शब्दों को समझने और लिखने में दिक्कत होने लगती है। [ये भी पढ़ें: डिपेंडेंट पर्सनालिटी डिसऑर्डर: जिसमें हो जाते हैं लोग दूसरों पर आश्रित]

एंग्जायटी डिसऑर्डर:
different types of mental disorder in childrensयह बीमारी बड़े लोगों में भी पायी जाती है, इसके होने पर बच्चा किसी भी बात पर या किसी भी परिस्थिति में बहुत ज्यादा डर जाता है। जो कि उसके शरीर के हाव-भाव में देखने को मिलने लगता है। इसमें बच्चे को बहुत ज्यादा पसीना आने लगता है और दिल की धड़कने बहुत तेज हो जाती है।

पर्वेसिव डेवलपमेंट डिसऑर्डर:
इस तरह के मानसिक विकार उत्पन्न होने के उपरान्त बच्चे को किसी भी समस्या से निकलने में बहुत ज्यादा परेशानी होने लगती है। वह दिमाग में इस बात को सुनिश्चित नहीं कर पाता है कि आखिर कैसे समस्या से निकला जाए। ऐसा होने पर बच्चे के दिमाग में हमेशा संशय का भाव रहता है। साथ ही उसे चिंता होने लगती है, जो उसके दिमाग पर प्रभाव डालता है।

ईटिंग डिसऑर्डर:
different types of mental disorder in childrensइस तरह की मानसिक समस्या बड़े लोगों में भी देखने को मिलती है। बच्चों में इस तरह का मानसिक रोग होने पर बच्चा खाने और वजन को लेकर कुछ असामान्य से विचार आने लगते है या तो वह बहुत ज्यादा खाने लगता है या फिर वह अपने वजन को लेकर इतना तनाव महसूस करने लगता है कि कुछ खाता ही नहीं है।

अफ्फेक्टिव मूड डिसऑर्डर:
इस तरह के मानसिक विकार उत्पन्न होने के कारण बच्चा बहुत ज्यादा उदास रहता है या फिर बहुत ज्यादा हंसता रहता है और थोड़े-थोड़े समय पर उसका मूड बदलता रहता है। वह कभी एकदम से हंसने लगता है, कभी एकदम से चुप हो जाना फिर रोने लगता है। इसमें बच्चा अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाता है और इस बात को समझने में परेशानी होने लगती है कि कब किस तरह से अपनी भावनाओं को व्यक्त करना है। [ये भी पढ़ें: गुस्से पर लगाम लगाने के लिए क्या करें]

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