जानें डिल्यूशनल डिसऑर्डर के बारे में जिसमें व्यक्ति को भ्रम होने लगता है

Delusional Disorder causes symptoms and treatment

कुछ लोगों को कई बार बिना किसी कारण ही कई बातों का भ्रम होने लगता है, जो एक सामान्य सी बात लगाती है। लेकिन जब यह जरूरत से ज्यादा और हर समय होने लगे तो यह भ्रम से सम्बंधित एक मानसिक विकार का रूप ले लेता है। जिसे मनोविज्ञान की भाषा में ‘डिल्यूशनल डिसऑर्डर’ कहा जाता है। यह मानसिक विकार काफी गंभीर मानसिक विकारों में से एक माना जाता है। इस तरह के मानसिक विकार में व्यक्ति का मन भ्रमित होने लगता है। ऐसे में व्यक्ति को खुद भी नहीं पता होता है कि वह जो कुछ भी महसूस कर रहा है वह सब एक भ्रम हैं। इस भ्रम के बारे में वह लोगों को बताने में भी कतराता है। [ये भी पढ़ें:  जानें क्या है बुलीमिया नेर्वोसा? इसके कारण, लक्षण और उपचार]

किन कारणों से होता है डिल्यूशनल डिसऑर्डर:
इस तरह के विकार के कारणों को लेकर मनोचिकित्सकों में कई तरह का संशय बना रहता है कि यह असल में किस कारण से होता है। लेकिन कुछ ऐसे कारण है जिसकी सहमति ज्यादातर मनोचिकित्सक देते हैं।

अनुवांशिकता:
इस तरह का विकार उन लोगों में सामान्यत: ज्यादा पाया जाता है कि जिन लोगों के माता-पिता या परिवार के किसी सदस्य को इस तरह के मानिसक विकार या फिर स्किज़ोफ्रेनिया जैसा कोई मानसिक विकार पहले हो चुका हो। इस तरह का मस्तिष्क विकार सबसे ज्यादा व्यक्ति में अपने माता-पिता के जरिए ज्यादा होता है।

बायोलॉजिकल:
कई शोधों में यह पाया गया है कि इस तरह के डिल्यूशनल डिसऑर्डर जैसे मानसिक विकार का कारण दिमाग के उन अंगों का ठीक से काम नहीं कर पाना होता है जो व्यक्ति के सोचने समझने से संबंधित होतें हैं।  [ये भी पढ़ें: दिन में बहुत ज्यादा सोना है नार्कोलेप्सी डिसऑर्डर का प्रमुख लक्षण]

दवाओं और शराब का सेवन:
इस विकार के लिए व्यक्ति का बहुत ज्यादा तनाव में होना भी एक अहम कारण माना जाता है। जरूरत से ज्यादा दवाओं का सेवन या फिर शराब आदि का अत्यधिक रूप से सेवन करने से भी हो सकता है। इन चीजों का सीधा असर व्यक्ति के दिमाग पर देखने को मिलता है जिसके कारण तनाव और तनाव के कारण इस तरह के विकार के होने की संभावना ज्यादा होती है।

डिल्यूशनल डिसऑर्डर के लक्षण:
डिल्यूशनल डिसऑर्डर जैसे मानसिक विकार में व्यक्ति दो तरह के लक्षण दिखाई पड़ते हैं-

स्वाभाव संबंधित लक्षण:
इस विकार के होने पर व्यक्ति के स्वाभाव में सबसे ज्यादा बदलाव देखने को मिलता है। ऐसे में व्यक्ति भावनात्मक रूप से कमजोर होने लगता है, छोटी से छोटी बात पर भी बहुत ज्यादा प्रतिक्रिया करता है। ऐसे लोगों में जरूरत से ज्यादा गुस्सा करने और स्वाभाव में चिड़चिड़ापन देखने को मिलता है।

हमेशा भ्रम में रहने जैसे लक्षण:
जैसा कि बताया जा चुका है कि डिल्यूशनल डिसऑर्डर में व्यक्ति की भ्रम हो जाता है, जिसके कारण वह जरुरत से ज्यादा भ्रम में रहने लगता है। ऐसे मे व्यक्ति को उन चीजों का आभास होने लगता है, जो असल में होती भी नही है।

डिल्यूशनल डिसऑर्डर की जांच:
यदि इस तरह के मानसिक विकार के लक्षण दिखाई देते हैं तो मनोचिकित्सक सबसे पहले व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री की जांच करता है, इसके साथ-साथ पीड़ित व्यक्ति का शारीरिक परिक्षण भी किया जाता है। इन सबके अतिरिक्त मनोचिकित्सक व्यक्ति के खून की जांच करता है। जिसके आधार पर यह सुनिश्चित किया जाता है कि कही पीड़ित को यह विकार किसी शारीरिक समस्या के कारण तो नहीं हो रहा है।

डिल्यूशनल डिसऑर्डर का उपचार:
डिल्यूशनल डिसऑर्डर के होने की पुष्टि होने पर व्यक्ति के उपचार के मनोचिकित्सक दवाओं और अलग-अलग तरह की थेरेपी का सहारा लेता है। थेरेपी में मुख्य रूप से व्यक्तिगत रूप से की जाने वाली थेरेपी, कोगनिटिव बिहेवियरल थेरेपी और फैमिली थेरेपी का प्रयोग किया जाता है। [ये भी पढ़ें: जानें क्या है सेल्फ हार्म डिसऑर्डर? इसके कारण और लक्षण]

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