जानें आटिज्म के कारण, लक्षण और जांच के तरीके

autism symptoms cause diagnosis

आटिज्म या आटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर(ए एस डी) मानसिक अस्वस्थता के कारण होने वाला एक मानसिक विकार है। इस तरह का मानसिक विकार बच्चों में अधिक पाया जाता है। इस तरह का मानसिक विकार व्यव्हार, सोशल और कम्युनिकेशन से जुड़े होते हैं। इसमें बच्चे का बहुत व्यवहार बहुत ज्यादा बदल जाता है, ऐसे में बच्चा एक ही काम को बार-बार करता है। [ये भी पढ़ें :अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर के दौरान कैसे करें बच्चे की देखभाल]

आटिज्म का कारण: आटिज्म किन कारणों से होता है, इसके बारे में ठीक से कहना मुश्किल होगा। लेकिन रिसर्च के अनुसार इसके दो अहम कारण माने जा सकते हैं। जो इस प्रकार हैं:

दिमाग की कोशिकाओं में बहुत ज्यादा कनेक्शन होना: बच्चे के दिमाग की कोशिकाएं हर वक्त विकसित होती रहती है। बच्चे कहते कुछ हैं और करते हैं कुछ। ऐसे में दिमाग में पाए जाने वाले कोशिकाओं के कनेक्शन को इससे नुकसान पहुंचता है। इसके कारण दिमाग ठीक से काम नहीं कर पाता है, जिसके कारण इस तरह की मानसिक समस्या होने लगती है।

अनुवांशिक तौर पर: कई बार इस तरह के मानसिक बच्चों में जन्म के साथ ही आते है। जो उनमें अनुवांशिक रूप से परिवार में किसी सदस्य के कारण आता है।

आटिज्म के लक्षण: इस तरह के मानसिक विकार में खास तौर पर तीन तरह के लक्षण दिखाई देते हैं।

  • बातों को कहनें में समस्या होना या कहते वक्त अलग तरह से किसी भी बात को कहना।
  • सोशल इंटरेक्शन।
  • एक ही काम को बार-बार करने की आदत।

इसके अतिरिक्त कुछ ऐसे लक्षण है जो बच्चे में उसमें एक या दो वर्षों में देखने को मिलते हैं।

  • बोलने में देरी।
  • लोगों और चीजों को पहचानें में।
  • एकदम से चेहरे पर भावों का ना आना।
  • दीवारों के निकट चलना या पकड़ कर चलना।
  • अकेले रहने की इच्छा।

आटिज्म की जांच: इस तरह के मानसिक विकार में डॉक्टर बच्चों की जांच कम उम्र में ही कर लेते हैं। क्योंकि इसके संकेत बच्चे में कम उम्र में ही नजर आने लगते हैं, इन संकेतों के आधार पर बच्चे की जांच की जाती है। संकेत इस प्रकार हैं:

  • आंखें नहीं मिलाना।
  • नाम से बुलाने पर प्रतिक्रिया नहीं देना।
  • लोगों के बोलने में दिक्कत होना।

इनके आधार पर निम्न तरीकों से इस तरह के विकार की जांच की जाती है।

डेवलेपमेंट स्क्रीनिंग: इसमें बच्चे के विकास पर डॉक्टर जन्म के साथ ही नजर रखना शुरू कर देता है। इस तरह की जांच तब की जाती है जब बच्चे का कोई भी भाई या बहन इस तरह की समस्या से जूझ रहा हो या फिर परिवार का कोई सदस्य बचपन में इस तरह की समस्या से गुजर चुका हो।

कॉम्प्रेहेंसिव बिहेविरल एव्युल्शन: इस तरह की जांच में बच्चे का शारीरिक और मानसिक रूप से जांच की जाती है। इस तरह की जांच में उसके शारीरिक और मानसिक व्यवहार दोनों को परखा जाता है। [ये भी पढ़ें :खेल-खेल में करें अपने मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त]

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