मन की संतुष्टि है खुश रहने का मूल मंत्र

self satisfaction is key to happiness

सभी के जीवन में कोई न कोई ऐसा कोना जरुर होता है, जिसकी वजह वह खुद को खुश नहीं कर पाता हैं। ज्यादातर लोग यह कोशिश करते हैं कि उस कोने को किस तरह से भर सकें ताकि जीवन में दुख को कम किया जा सके। यहां कहने का तात्पर्य यह है कि हम उस चीज के पीछे हमेशा भागते हैं जो हमारे पास नहीं होता है, हम हर समय उस बात का दुःख सताए रहता है। जिसके कारण हम उन चीजों को पूरी तरह से भूल जाते हैं जो हमारे पास है। यही हमारी खुशियों के बीच की सबसे बड़ी रूकावट होती है। इस रूकावट को दूर करने के लिए जरुरी है कि व्यक्ति के भीतर संतोष की भावना हो। इसी तरह से खुश रहने के कुछ खास मूल मंत्र हैं जो व्यक्ति को भीतर से खुश रखता है। आइए जानते हैं उनके बारे में। [ये भी पढ़ें: नकारात्मकता के शिकार व्यक्ति में दिख सकते हैं ये लक्षण

जो आपके पास है उस पर विश्वास करें न जो किस्मत में: खुश रहने का सबसे पहला मूल मंत्र यह है कि जो भी आपके पास है उस पर अपना विश्वास बनाये रखें। न कि अपने समय को अपनी किस्मत के भरोसे छोड़ दें। हम हमेशा उन चीजों के पीछे भागते हैं जो हमारे पास नहीं होती हैं। इसलिए कभी भी खुश रहने के लिए अपनी किस्मत पर विश्वास ना करके खुद पर विश्वास रखें।

दूसरों के कामों पर ध्यान न दे कर के खुद के कार्य पर ध्यान दें: खुश रहने का दूसरा मूल मंत्र हैं – दूसरों के कार्यों पर ध्यान न देकर खुद के कामों पर ध्यान दें। यह एक तरह की मानव प्रवृति है कि हम अपने काम से मतलब नहीं रखते हैं। बल्कि दूसरों के कामों पर बहुत ज्यादा ध्यान देते हैं। इस तरह की भावनाओं के कारण व्यक्ति खुद को खुश नहीं रख पाता है। यदि व्यक्ति यह करना छोड़ दें और केवल अपने आप से मतलब रखते हैं तो इससे आप ज्यादा खुश रख सकते है। [ये भी पढ़ें: आपको खुशियों से मीलों दूर कर देता है इस तरह का व्यवहार]

बाधाओं के बजाय अवसरों को पहचाने: खुश रहने का तीसरा मूल मंत्र अपनी बाधाओं के बजाय अपने अवसरों को पहचाने। हम सबसे पहले उन बातों को पहले रखते हैं जो हमारे कार्य के बीच में बाधा बनती है। जिसके कारण हम कई बार सफल नहीं हो पाते हैं। हर काम में पहले उसकी बाधाओं को गिनवाने से व्यक्ति के भीतर उस काम के प्रति आत्मविश्वास की कमी देखने को मिलती है और यही खुशियों में खटास डाल देता है। यदि हम उस काम से मिलने वाले फायदों और अवसरों को ध्यान में रखकर काम को करेगें तो उससे काम करने में मन तो लगेगा। साथ ही साथ आप खुश भी रहेंगे।

अपने जहन में वही बात लाये जो आपके लिए जरुरी है: खुशियों का चौथा मूल मंत्र है उन्हीं बातों को दिमाग में रखे जो आपके लिए जरुरी है। हमारे दिमाग में कई सारे विचार घूमते रहते हैं। जिनमे से कुछ तो बहुत जरुरी होते हैं लेकिन कुछ बाते ऐसी होती है , जिसका कोई भी मतलब नहीं होता है। इन बातों की वजह से भी हम कई बार मानसिक रूप से शांत नहीं रह पाते हैं। जिसके कारण हम अपनी खुशियों को तलाश नहीं पाते हैं। खुश रहने के लिए जरुरी है कि हम सिर्फ और सिर्फ उन बातों को ही अपने जहन में रखें जो हमारे लिए जरुरी है। [ये भी पढ़ें: नकारात्मक परिस्थिति में भी कैसे रखें सकारात्मक सोच बरकरार]

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