नकारात्मक परिस्थिति में भी कैसे रखें सकारात्मक सोच बरकरार

how to stay positive in negative situation

कई बार जीवन में विपरीत परिस्थितियां आ जाती हैं और हम अपने मन के मुताबिक कार्य नहीं कर पाते हैं। ऐसी परिस्थति का सामना हम सभी को कभी ना कभी करना ही पड़ता है, जिसके कारण हमारे अंदर नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है और हम बहुत ज्यादा निराशा में डूब जाते हैं जो कि हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है। ऐसे में खुद को बहुत मोटिवेट करने की आवश्यकता होती है। इन परिस्थितियों में खुद में सकारात्मक भावनाओं का लाना बेहद जरुरी होता है, जिसके कारण आप किसी भी परिस्थिति में खुद को ढाल सकते हैं। आइए जानते हैं कि कैसे नकारात्मक परिस्थिति में भी सकारात्मक रहा जा सकता है। [ये भी पढ़ें: आपको खुशियों से मीलों दूर कर देता है इस तरह का व्यवहार]

सकारात्मक सोच वाले लोगों के साथ रहें:
how to stay positive in negative situationयदि आप अपने अंदर सकारात्मक ऊर्जा को उत्पन्न करना चाहते हैं तो इसके लिए जरुरी यह है कि आप उस माहौल और उन लोगों के साथ रहें जो पहले से सकारात्मक सोच और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण हो और उनमें किसी भी तरह की निराशा की सोच ना हो। इस तरह के लोगों के साथ रहने से आप भी सकारात्मक महसूस करने लगेंगे और अपने अंदर के नकारात्मक भावों को हटा सकेंगे।

हर काम में खुद को आभारी समझें: अपने आप में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए हमेशा दूसरों के प्रति आभार व्यक्त करना आवश्यक होता है। जिससे सामने वाले को तो खुशी मिलेगी ही साथ ही आप अंदर से बहुत अच्छा महसूस करने लगेंगे और आपके अंदर सकारात्मकता का प्रवाह भी हो जाएगा। [ये भी पढ़ें: बहुत ज्यादा पैसा: ख़ुशी या महज एक मिथक]

खुद को मोटिवेट करें:  कई बार हम खुद को बाकि लोगों से कम मानने लगते हैं। अपने आपको दूसरों से कमजोर मानने के कारण भी सोच में नकारात्मकता आती है इसलिए खुद को बाकियों से कम ना मानें, खुद को मोटिवेट करें। इसके साथ-साथ खुद की प्रतिभा को भी पहचाने, खुद से बातें करें और खुद को जानने और समझाने की कोशिश करें कि आप किस चीज में बाकियों से बेहतर हैं। इस तरह आपके भीतर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।

शारीरिक और मानसिक व्यायाम करें: व्यक्ति को सकारात्मक रहने के लिए जरुरी है कि वह मानसिक और शारीरिक व्यायाम करें। व्यायाम के लिए सबसे अच्छा समय सुबह को बताया जाता है, जिसके कारण आप दिन भर तरो-ताज़ा रहते हैं। मानसिक स्वास्थ्य पर व्यायाम का विशेष प्रभाव पड़ता है, जिससे व्यक्ति तनाव और डिप्रेशन मुक्त रहता है और मन से नाकारात्मक विचार कम हो जाते हैं।

विपरीत परिस्थितियों से भागे नहीं बल्कि समाना करें: हम कई बार विपरीत परिस्थिति से भागने लगते हैं। भागने से तात्पर्य यह है कि जब हमें उसका कोई भी उपाय नहीं मिलता है तो उसे हम समय के अनुसार छोड़ देते हैं। जो कि गलत है, कैसी भी परिस्थिति हो हमें भागना नहीं चाहिए, उसका सामना करना चाहिए और उसको सुलझाने के लिए हर तरह से प्रयास करना चाहिए। जब हम इस तरह की परिस्थिति से निकलने लगते हैं तो उससे हमारे भीतर एक सकारात्मक सोच उजागर होने लगती है। [ये भी पढ़ें: जानें सबकुछ होकर भी क्यों नहीं रह पाते हैं आप खुश]

उपयोग की शर्तें

" यहाँ दी गयी जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । यहाँ सभी सामग्री केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि यहाँ दिए गए किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है। अगर यहाँ दिए गए किसी उपाय के इस्तेमाल से आपको कोई स्वास्थ्य हानि या किसी भी प्रकार का नुकसान होता है तो lifealth.com की कोई भी नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती है। "