भावनात्मक दुख को कम करके कैसे पाएं खुशियां

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how to deal with emotional baggage and move on in your life

जीवन में अच्छे और बुरे दोनों तरह के अनुभव होते हैं। अक्सर लोग अपने जीवन की घटनाओं से बहुत प्रभावित होते हैं जिसके कारण वो तनाव में आ जाते हैं। इस कारण सुखी जीवन व्यतीत कर पाना असंभव हो जाता है। भावनात्मक दुख किसी भी व्यक्ति को परेशान कर सकता है। अपनी जिंदगी में हर कोई व्यक्ति एक बार तो भावनात्मक दुख का सामना करता ही है। अक्सर लोग अपनी उन भावनाओं को दबाने की कोशिश करते हैं जो उन्हें दुख पहुंचाती हैं। हालांकि ऐसा करके आप गलती करते हैं। इस निराशाजनक स्थिति से बाहर आने के लिए आपको अपनी भावनाओं को सामना करना पड़ता है। अगर आप भी भावनात्मक दुख से जूझ रहे हैं तो आप इसे कम करने के लिए कुछ तरीके अपना सकते हैं। [ये भी पढ़ें: संकेत जो बताते हैं कि आपको सफलता जरुर मिलेगी]

अपने साथ समय बिताएं
हर व्यक्ति को अपने साथ निजी समय बिताना चाहिए। इसका मतलब ये नहीं है कि आप बैठकर जीवन की सभी दुखद घटनाओं के बारे में सोचें। इस समय में अपनी स्थिति के बारे में विचार करें और खुशी पाने का रास्ता ढूंढें।

अपने शौक पूरा करें
हम में से सभी व्यक्ति कोई ना कोई शौक तो रखता ही है। चाहे वह रचनात्मक हो या कोई और। आपको शौक आपको खुश रखने में मदद करते हैं लेकिन हमारे जीवन में चल रही घटनाओं के कारण हम अक्सर अपने शौकों को अनदेखा कर देते हैं। अगर आप भावनात्मक दुख से बाहर निकलना चाहते हैं तो अपने शौक और जुनून पर ध्यान दें और इन्हें समय दें। [ये भी पढ़ें: जब भी निराश हों तो खुश होने के लिए अपनाएं कुछ उपाय]

अपने आसपास अच्छी चीजों को देखें
हमारे जीवन में चल रही बहुत सी बुरी और नकारात्मक चीजों के चलते हम खुद को खुश नहीं रख पाते हैं। इसलिए नकारात्मक चीजों को छोड़कर अपना ध्यान आसपास की अच्छी चीजों पर केंद्रित करें।
उन चीजों को देखें जो आपको खुशी देती हैं।

अपनी भावनाओं को बहने दें
अपनी भावनाओं को कभी भी दबाएं नहीं। इन्हें बहने दें और आप इनके साथ ही अपनी जिंदगी के पलों को जिएं। इससे आप अच्छा महसूस करेंगे। उन भावनाओं पर ध्यान ना दें जो आपको परेशान करती हैं।

अपनी भावनाओं के साथ आगे बढ़ें
आपके साथ कुछ भी हो, कितनी परेशानी क्यों ना हो, लेकिन जिंदगी रुकती नहीं। आपको इसे जीना ही होता है। इसलिए क्यों ना आप खुश होकर जिएं। अपनी भावनाओं को खुद पर हावी ना होने दें बल्कि इनके साथ आगे बढ़ें। दुखी होना स्वभाविक है लेकिन इस दुख को लंबे समय तक ढ़ोना उचित नहीं। [ये भी पढ़ें: अकेले समय व्यतीत करने से क्या फायदे होते हैं]

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