जानें सब कुछ होकर भी क्यों नहीं रह पाते हैं आप खुश

Despite having everything why you are not happy

खुशी हमारे भाव का एक प्रतीकात्मक रूप है, जो हमारी भावनाओं में आने वाले सकारात्मक परिवर्तनों के कारण देखने को मिलता है। खुशी एक भावना है जिसकी परिभाषा सभी के लिए अलग-अलग होती है। कोई एग्जाम में अच्छे नंबर पाकर भी खुश नहीं हो पाता है, तो कोई पासिंग नंबप लाकर भी बहुत ज्यादा खुश हो जाता है। कई बार व्यक्ति के पास सब कुछ होते हुए भी वह खुश नहीं रह पाता। इसके पीछे उनकी नकारात्मकता और असंतोष की भावना जिम्मेदार होती है। कुछ और कारणों से भी व्यक्ति खुश नहीं रह पाता। आइए ऐसे ही कारणों के बारे में जानते हैं। [ये भी पढ़ें: आपको खुशियों से मीलों दूर कर देता है इस तरह का व्यवहार]

नकारात्मकता का भाव होने के कारण: किसी भी व्यक्ति में नकारात्मक सोच के पैदा होने पर उसका खुश रहना बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाता है। जिन लोगों में इस तरह की सोच पैदा हो जाती है वह हर चीज में बस उसके नकरात्मक पहलुओं की बात करते हैं। इस तरह के लोगों का खुश रह पाना बहुत ज्यादा कठिन होता है। इसलिए जरुरी है कि खुश रहने के लिए अपने अंदर के नकारात्मक सोच को उत्पन्न किया जाये।

मन में असंतोष की भावना का होना: यह प्रवृति हम सभी में पायी जाती है कि हम अपने आप से कभी भी संतुष्ट नहीं होते हैं। हमारे पास जो कुछ भी होता है उसमें हम संतोष नहीं कर पाते हैं, उससे ज्यादा की इच्छा के कारण हम खुश नहीं रह पाते हैं। मन के अंदर असंतोष की भावना ही हमें खुश नहीं रहने देती है। जो व्यक्ति लखपति है उसे करोड़पति बनना है, जो करोड़पति है उसे अरबपति बनने की चाह होती है। यही चाह व्यक्ति को खुशियों के दूर करती है क्योंकि वह आगे के चक्कर मे अभी की चीजों को छोड़ देता है जो उसे खुशी देती है। ये भी पढ़ें: खुशी से जुड़ी कुछ गलत अवधारणाएं]

मन में सामने वाले के प्रति द्वेष की भावना उत्पन्न होना: एक कहावत है कि हम जितना अपने दुख से दुखी नहीं होते, उतना किसी और के सुख से दुखी होते हैं। कई बार सामने वाले को सुखी देखकर या उसे आगे बढ़ता देखकर हमारे मन में द्वेष की भावना उत्पन्न होने लगती है। इस कारण हम अपनी खुशियों में शामिल नहीं हो पाते हैं। हम हमेशा दूसरों के बारे में सोचते हैं। इसलिए जो हमारे पास है चाहे वह कम ही क्यों ना हो उसमें ही रहना चाहिए और किसी के प्रति द्वेष की भावना का आना सही नहीं।

निराशा की भावना होना: हम कई बार बहुत ज्यादा निराश हो जाते हैं जो कि परिस्थिति के अनुकूल भावनात्मक प्रतिक्रिया है। लेकिन इस भाव को हमेशा रखना, अपने काम के प्रति बहुत ज्यादा निराश हो जाना यह सभी बातें हमें खुशियों से दूर करती है। [ये भी पढ़ें: लाफ्टर थेरेपी से भी दूर की जा सकती हैं कई बीमारियां]

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