पोस्टपार्टम डिप्रेशन क्या होता है और इसके कारण क्या होते हैं

What is Postpartum Depression and what are it's causes

गर्भधारण करना हर महिला के लिए जीवन का खूबसूरत एहसास होता है। लेकिन यह हर महिला के लिए हो ऐसा जरुरी नहीं है। ऐसा कुछ महिलाओं के डिप्रेशन से गर्सित हो जाने की वजह से होता है। इसे पोस्टपार्टम डिप्रेशन कहते हैं। इस अवस्था में हाल ही में बनी मां को खुशी महसूस नहीं होती है साथ ही वह अपने बच्चे के साथ भावनात्मक रुप से जुड़ भी नहीं पाती है। यह बच्चा हो जाने के एक साल अंदर कभी भी हो सकता है। इस डिप्रेशन से कई लोगों को यह गलत धारणा होती है कि यह सिर्फ पहली बार मां बनी महिलाओं को होता है पर ऐसा जरुरी नहीं है। यह पहले बच्चे के जन्म के बाद भी हो सकता है। [ये भी पढ़ें: क्या सोशल मीडिया आपको डिप्रेशन का शिकार बना रहा है]

पोस्टपार्टम डिप्रेशन क्या होता है?
हर महिला को बच्चे के जन्म के बाद कई भावनाएं उत्पन्न होती है लेकिन यह कुछ समय बाद शांत भी हो जाती हैं। कुछ केस में इस भावनाओं का मां पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जो अंत में पोस्टपार्टम डिप्रेशन में बदल जाता है। इस डिप्रेशन के कुछ सामान्य लक्षण और कारण होते हैं।

  •  अकेलेपन की भावना आना।
  • बच्चे के साथ जुड़ने में असमर्थता।
  •  दूसरों से अलग होना।
  •  लगातार मूड के बदलाव आना।
  •  शिशु की देखभाल करने के लिए प्रेरणा का अभाव होना।
  • नकारात्मकता की भावना आना।
  •  निराशा और उदासी महसूस करना।
  •  नींद की समस्या।
  •  बच्चे के बारे में डरावने विचार आना। [ये भी पढ़ें: म्यूजिक थेरेपी से करें डिप्रेशन का इलाज]

पोस्टपार्टम डिप्रेशन का कारण क्या है?

हार्मोनल बदलाव होना:
प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव आते हैं। बच्चे के जन्म के बाद ये हार्मोन्स वापस से नार्मल होने लगते हैं जिसकी वजह से महिलाओं का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। मां के शरीर में होने वाले बदलाव के कारण उनका दिमाग भी प्रभावित होता है।

भावनात्मक रूप से थकान महसूस करना:
एक बच्चे की डीलिवरी किसी भी माता के लिए एक बहुत ही कठिन प्रक्रिया होती है और इसके परिणामस्वरूप वह उसके बाद पूरी तरह से भावनात्मक रूप से थकान महसूस करती हैं। यह थकान अक्सर पोस्टपार्टम डिप्रेशन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

शारीरिक परिवर्तन को अनुभव करना:
डिलीवरी के बाद एक मां का शरीर पूरी तरह से बदल जाता है। कुछ माताओं के लिए परिवर्तनों के अनुकूल होने और उन्हें स्वीकार करना बहुत कठिन है। जो महिला पहली बार मां बनती हैं उन्हें मां बनने के अनुभव की कोई जानकारी नहीं होती है इस वजह से उन्हें शारीरिक परिवर्तन को स्वीकार करना मुश्किल होता है। [ये भी पढ़ें: दौड़ना डिप्रेशन की समस्या में कैसे राहत दिला सकता है]

उपयोग की शर्तें

" यहाँ दी गयी जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । यहाँ सभी सामग्री केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि यहाँ दिए गए किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है। अगर यहाँ दिए गए किसी उपाय के इस्तेमाल से आपको कोई स्वास्थ्य हानि या किसी भी प्रकार का नुकसान होता है तो lifealth.com की कोई भी नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती है। "