जानिए कितने प्रकार से हो सकता है डिप्रेशन

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ऐसी अवस्था जिसमें व्यक्ति के दिमाग में नकारात्म विचारों की अधिकता हो जाती है डिप्रेशन कहलाता है। डिप्रेशन कई प्रकार के होते हैं। कुछ के लक्षण साधारण होते हैं तो कुछ डिप्रेशन में लक्षण गंभीर हो सकते हैं। अगर डिप्रेशन की अवस्था लंबे समय तक रहे तो यह गंभीर रूप ले सकती है। अगर यह लगातार बढ़ता रहा तो पीड़ित व्यक्ति की मौत की भी संभावना रहती है। आइए जानते हैं कि डिप्रेशन के टाइप के बारे में। [ये भी पढ़ें: इन आसान तरीकों से दूर कर सकते हैं डिप्रेशन]

1. मेजर डिप्रेशन: मेजर डिप्रेशन को मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर भी कहते हैं। इस डिप्रेशन में व्यक्ति के मूड में बदलाव, दैनिक गतिविधि में कम रूचि जैसी चीजें होती हैं। मेजर डिप्रेशन में इंसान की जिंदगी के हर पहलू जैसे काम-काज, व्यवहार, सोशल रिलेशनशिप सब पर प्रभाव पड़ता है। मेजर डिप्रेशन के लक्षणों का अनुभव 2 हफ्तों तक होता है। मेजर डिप्रेशन भी कई प्रकार के होते है।

a. मैलनकोलिआ: इस तरह के डिप्रेशन में इंसान में शारीरिक बदलाव नजर आते हैं जैसे- इंसान का बहुत धीरे चलना। साथ ही मन भी उदास रहता है और व्यक्ति को महसूस ऐसा महसूस होता है जैसे सब कुछ खो गया हो। [ये भी पढ़ें: डिप्रेशन से ग्रस्त लोगों में दिखाई देते हैं ये लक्षण]

b. मानसिक डिप्रेशन: कभी-कभी डिप्रेशन से ग्रसित लोगों को वास्तविक और मानसिक अनुभव के साथ संपर्क खो सकते हैं। मानसिक डिप्रेशन में लोगों को ऐसा महसूस होने लगता है कि वह बहुत बुरे हैं और सभी लोग उनका पीछा कर रहे हैं। उनको ऐसा भी लगता है जैसे सारे लोग उनके खिलाफ हैं। जिससे वह बीमार हो जाते हैं और कुछ गलत कर लेते हैं।

c. एंटीनेटल और पोस्टनैटल डिप्रेशन: महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान डिप्रेशन में जाने का डर ज्यादा होता है। बच्चे के जन्म के बाद जब महिला डिप्रेशन में जाती है तो ये काफी समय तक के लिए होता है। जिसका प्रभाव सिर्फ महिला पर होता है। इसका बच्चे या घरवालों के साथ संबंध पर कोई असर नहीं पड़ता है। बच्चे के जन्म के कुछ समय बाद महिलाएं बेबी ब्लू का अनुभव करती हैं। बच्चे के जन्म के बाद कुछ दिनों तक बहुत ज्यादा भावनात्मक महसूस करने को बेबी ब्लू कहते हैं। इससे 80 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं ग्रसित होती हैं।

2. बाइपोलर डिसऑर्डर: बाइपोलर डिसऑर्डर को मैनिक डिप्रेशन भी कहते हैं। इस तरह के डिप्रेशन में इंसान को जल्दी गुस्सा आता है साथ ही मूड भी अचानक से खुशनुमा तो कभी एक दम से शांत भी हो जाता है। कुछ लोगों को तो ऐसा लगता है कि उनके पास सुपर पावर आ गई हैं और साथ ही चिड़चिड़े भी हो जाते हैं।

3. साइक्लोथमिक डिसऑर्डर: इस तरह के डिप्रेशन में लोगों को कम से कम दो सालों तक इसका अनुभव होता है और कोई भी बदलाव दो महीने से ज्यादा नहीं होता हैं। हर महीने व्यक्ति के मूड या शारीरिक गतिविधियों में बदलाव आते रहते हैं। इसके लक्षण कम समय तक रहते हैं साथ ही यह कम गंभीर और अनियमित होते हैं।

4. डिस्थ्यिमिक डिसऑर्डर: इस तरह के डिप्रेशन में व्यक्ति 1 या 2 साल से ज्यादा वक्त रहता है। इसके लक्षण गंभीर नहीं होते लेकिन व्यक्ति को अपने रोज के काम करने में मुश्किल होती है। साथ ही वह अपने आप को अस्वस्थ भी महसूस करता है।

5. सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर:
know about different types of depressionइस तरह का डिप्रेशन मौसम के अनुसार होता है। ठंड में सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा की मात्रा कम हो जाने के कारण कुछ लोग डिप्रेशन में चले जाते हैं। सीजनल डिप्रेशन में लोग ज्यादा सोते हैं, ज्यादा खाते हैं जिसके कारण उनका वजन बढ़ जाता है।  [ये भी पढ़ें: डिप्रेशन के बारे में कितना जानते हैं आप]

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