डिप्रेशन के बारे में कितना जानते हैं आप

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How much you know about depression

डिप्रेशन एक मानसिक अवस्था है जिसमें मन लगातार उदास रहता है और दैनिक गतिविधियों में मन नहीं लगता है। डिप्रेशन से प्रभावित व्यक्ति हर बात में निगेटिव चीजे सोचता है। जिसका प्रभाव मानसिक के साथ शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। बहुत से लोग इस अवस्था को गंभीरता से नहीं लेते हैं जिसकी वजह से उन्हें तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एक शोध के अनुसार भारत में हर 10 लोगों में से 1 व्यक्ति डिप्रेशन से ग्रसित है। [ये भी पढ़ें: जानिए कितने प्रकार से हो सकता है डिप्रेशन]

डिप्रेशन क्यों होता है:
डिप्रेशन की अभी तक कोई सही वजह पता नही चल पाई है। रिसर्च के मुताबिक डिप्रेशन का केवल एक ही कारण नहीं है। अक्सर डिप्रेशन का कारण लोगों का अकेला महसूस करना माना जाता है और ये अकेलापन महसूस करने के कई कारण हो सकते हैं। नौकरी छूट जाना, जीवन में असफलता, शादी टूट जाना जैसे कई कारण ज्यादातर मामलों में सामने आते हैं। कुछ बॉयोलॉजिकल कारण भी होते हैं जिससे व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है जैसे- हाई ब्लडप्रेशर कम करने की दवाओं के साइडइफेक्टस की वजह से डिप्रेशन होने की संभावना होती है। इसे एक आनुवांशिक बीमारी भी कहा जा सकता है, अगर माता-पिता में से किसी को ये समस्या हुई हो तो यह उनके बच्चों को भी हो सकती है। डिप्रेशन के लक्षण निम्नलिखित हैं:

शोधकर्ताओं को भी डिप्रेशन में जाने का असली कारण नहीं पता चल पाया है लेकिन उनका मानना है कि यह निम्नलिखित फैक्टर डिप्रेशन में जाने कारण बन सकते हैं:

  • आनुवंशिकी(जेनेटिक): परिवार में किसी एक के डिप्रेशन से ग्रसित होने के कारण दूसरों में विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • तनाव: जीवन में कुछ तनावपूर्ण होना। जैसे किसी की मौत हो जाना या किसी का चले जाना। तनाव को डिप्रेशन का ट्रिगर कहा जा सकता है।
  • असंतुलित हार्मोंस: हार्मोंस में बदलाव के कारण यह डिप्रेशन के ट्रिगर हो सकते हैं। खासकर प्रेग्नेंसी के बाद।

डिप्रेशन कैसे दिमाग को प्रभावित करता है:
इंसान के दिमाग के तीन भागों का डिप्रेशन में अहम रोल होता है।

  • हिप्पोकैंपस
  • प्रीफ्रंटल कॉरटेक्स
  • एमिगडला

1. हिप्पोकैंपस:
हिप्पोकैंपस दिमाग के बीच में स्थित होता है। जो की हमारी मैमोरी को जमा करता है और साथ ही कार्टिसोल नाम के हार्मोंस के उत्पादन को नियंत्रित करता है। हमारा शरीर कार्टिसोल हार्मोंस को डिप्रेशन और मानसिक तनाव के समय रिलीज करता है, लेकिन परेशानी तब होती है जब अधिक मात्रा में यह हार्मोंस दिमाग में रिलीज करने की वजह से हमारे शरीर में केमिकल असंतुलन हो जाता है। डिप्रेशन में कार्टिसोल का उत्पादन बढ़ जाता है जिससे हिप्पोकैंपस में न्यूरॉन्स सिकुड़ने लगते है और व्यक्ति को याददाश्त की समस्या हो सकती हैं।

2. प्रीफ्रंटल कॉरटेक्स:
प्रीफ्रंटल कॉरटेक्स दिमाग के आगे के हिस्से में स्थित होता है। इसका काम भावनाओं का विनिमयन, निर्णय लेना और यादों का गठन करना होता है। जब हमारा शरीर ज्यादा मात्रा में कार्टिसोल का उत्पादन करता है तो प्रीफ्रंटल कॉरटेक्स सिकुड़ने लगता है।

3. एमिगडला:

what do you know about depressionएमिगडला दिमाग का वह हिस्सा है जो भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करता है जैसे- डर और खुशी। डिप्रेशन में ज्यादा मात्रा में कार्टिसोल का उत्पादन होने के कारण एमिगडला बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाता है। एन्लार्ज और हाइपरएक्टिव एमिगडला के साथ दिमाग में असामान्य गतिविधियां होने लगती हैं। जिसकी वजह से आपकी नींद और बाकि गतिविधियों में बदलाव आने लगता हैं और आपके शरीर से अनियमित मात्रा में हार्मोंस और अन्य केमिकल निकलने लगते हैं। जिससे कई परेशानियां हो जाती हैं।
कई शोधकर्ताओं के मुताबिक कार्टिसोल शारीरिक बदलाव और केमिकल एक्टिविटी को बदलने में भूमिका निभाता है। सामान्य लोगों में कोर्टिसोल हार्मोंस का लेवल सुबह ज्यादा और रात के समय कम होता है लेकिन डिप्रेशन में रात के समय भी कोर्टिसोल का लेवल ज्यादा ही रहता है।

इलाज से कैसे दिमाग को ठीक किया जा सकता है:
डॉक्टर के मुताबिक कार्टिसोल और अन्य केमिकल को संतुलित करके हिप्पोकैंपस को सिकुड़ने से बचाने में मदद मिलती है और इसके कारण हुई याददाश्त की परेशानी को ठीक करता है। शरीर में केमिकल का लेवल सामान्य करने से डिप्रेशन के लक्षण कम करने में मदद मिलती है। कुछ दवाईयों का सेवन करके इसे ठीक किया जा सकता है। साथ ही फिजियोथैरेपी से दिमाग की संरचना को आराम पहुंचाने में मदद मिलती है। [ये भी पढ़ें: डिप्रेशन की वजह से शरीर पर पड़ सकते हैं ये प्रभाव]

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