यौन संचारित रोगों के उपचार के लिए अपनाएं ये तरीके

treatments for sexually transmitted diseases

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यौन संचारित रोगों के लिए कभी भी खुद उपचार ना करें। यह बीमारी संक्रामक और गंभीर होती हैं। अगर शुरुआत में ही इन रोगों के बारे में पता चल जाए तो यौन संचारित रोगों का इलाज एंटीबायोटिक से किया जा सकता है। वायरल एसटीडी को ठीक नहीं किया जा सकता है मगर आप इसके लक्षणों को दवाई लेकर थोड़ी राहत जरूर पा सकते हैं। हेपेटाइटिस बी के लिए आप वैक्सीन करा सकते हैं मगर आपको यह रोग हो गया है तो इससे भी कोई फायदा नहीं होगा। अगर आप यौन संचारित रोगों के लिए एंटीबायोटिक से इलाज कर रहे हैं तो इसके लिए जरुरी है आप बताई हुई दवाई लें और एक बार आपके लक्षण चलें जाए तो अपने इंफेक्शन को ठीक करने के लिए कोई और दवाई ना लें। इससे परेशानी बढ़ सकती है। आइए जानते हैं यौन संचारित रोगों के इलाज की प्रक्रिया के बारे में।

1-एचआईवी/एड्स:

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वैसे तो एड्स के लिए कोई इलाज नहीं है मगर एचआईवी के लेवल को सही रख कर इस पर काबू पाया जा सकता है। एंटीरेट्रोवाइरल दवाईयां एचआईवी के लिए थैरेपी है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह हैं कि इस थैरेपी को कब किया जाए। कुछ डॉक्टर इसे शुरुआती स्टेज में करने को कहते हैं तो कुछ डॉक्टर इसके साइडइफेक्ट दिखने के बाद। [ये भी पढ़ें: सिफलिस है एक घातक यौन संचारित रोग]

2- क्लैमाइडिया और गोनेरिआ:इन यौन संचारित रोगों का एंटीबायोटिक से इलाज किया जा सकता है। टेस्ट में पता चलने के बाद आपको इसके इलाज के लिए दवाईयां लेना शुरु कर देना चाहिए। हालांकि टेस्ट के बाद भी आपको इसके लक्षण नहीं दिखते हैं। आपके साथी का भी इलाज होना चाहिए चाहे उनको लक्षण हो ना हो। गोनेरिआ में कुछ ज्यादा परेशानी हो जाती है जिसके लिए आपको गोनेरिआ के इलाज के लिए अपनी दवाई का डोज बढ़ाना पड़ता है। ध्यान रहे आपका पार्टनर भी इसके लिए ट्रीटमेंट कराए। आप तीन महीनें बाद इंफेक्शन ठीक हुआ की नहीं के लिए टेस्ट करवा सकते हैं। अगर क्लैमाइडिया और गोनेरिआ का इलाज फेल हो जाता है तो इसका परिणाम ये होता है आपके प्रजनन अंग खराब हो जाते हैं और आप कभी मां नहीं पाती हैं।

3-सिफलिस:

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सिफलिस के लिए पेनिसिलिन ही एक इलाज है लेकिन शुरुआती समय में अंगों को बैक्टीरिया से बचाने के लिए काफी परेशानी होती है।

4- जेनिटल हर्पीज:यदि एक बार आपको यह इंफेक्शन हो जाए तो यह आपके शरीर में हमेशा रहता है चाहे आप इसका इलाज ही क्यों ना करा लें। एक बार यह घाव ठीक होने के बाद यह एक साल में कई बार होते हैं। एंटीवाइरल दवाईयां लेने से यह घावों को कम करने में मदद करती हैं। अगर यह बार-बार होते हैं तो इसके लिए आपको थैरेपी करनी चाहिए। थैरेपी में डॉक्टर आपको दवाई देता है जो इन घावों को से ठीक करने में मदद करेगी।

5- जेनिटल वार्ट:

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जेनिटल वार्ट का कोई इलाज नहीं है। बहुत से जेनिटल वार्ट बिना इलाज के ठीक हो जाते हैं मगर आप में इसके वायरस रहते हैं। अगर आप जेनिटल वॉर्ट का इलाज करना चाहते हैं तो उसके लिए कई तरीके हैं। मस्से पर सीधे दवा देकर ठीक करना या अगर इस तरीके से भी ठीक नहीं होता है तो आप सर्जरी करके इसे हटा सकते हैं मगर ध्यान रहे इससे सिर्फ मस्सा हटेगा। इंफेक्शन आपके शरीर में अभी भी रहेगा। [ये भी पढ़ें: महिलाओं में ये लक्षण करते हैं यौन संचारित रोगों की तरफ इशारा] 

6- हेपेटाइटिस बी:हेपेटाइटिस बी का इलाज करके आप इस वायरस को लीवर खराब करने से रोकते हैं। हेपेटाइटिस बी का इलाज करने के लिए अब पांच दवाईयां हैं। हर दवाई के फायदे और नुकसान दोनों होते हैं तो इसे लेने से पहले अपने डॉक्टर से जरुर सलाह ले लें। अगर एक बार आपके लीवर में यह वायरस आ गया तो लीवर ट्रांसप्लांट के बाद ही यह ठीक होगा।

7-ट्रिकोमोनालिसिस:इसे इलाज से ठीक किया जा सकता है। यह 90% तक ठीक हो सकता है।

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