ये टेस्ट बताते हैं कि आप एचआईवी पॉजिटिव हैं या नहीं

tests which diagnose HIV aids

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ह्यूमन इम्यूनों डेफिसिएन्सी वायरस(एचआईवी) शरीर के प्रशिक्षा प्रणाली(इम्यून सिस्टम) पर हमला करता है। जब यह वायरस आपके इम्यून सिस्टम को पूरी तरह नष्ट कर देता है तो यह अवस्था एड्स कहलाती है। एचआईवी की जांच के लिए टेस्ट दो स्टेज होते हैं। पहला प्राइमरी टेस्ट और दूसरा कन्फर्मटॉरी टेस्ट। अगर यह टेस्ट पॉजिटिव होता है तो दोबारा से यही टेस्ट किया जाता है। अगर प्राइमरी टेस्ट दो बार पॉजिटिव आता है तो इससे एचआईवी की पुष्टि हो जाती है। इस टेस्ट को इसलिए किया जाता है ताकि प्राइमरी टेस्ट में एचआईवी के अलावा किसी और इंफेक्शन पर रिएक्शन ना हो। एचआईवी का टेस्ट करने के कई तरीके हैं और हर पहला तरीका दूसरे से अलग है। [ये भी पढ़ें: यौन संचारित रोगों की रोकथाम के लिए रखें इन बातों का ध्यान]

एचआईवी के प्राइमरी टेस्ट के प्रकार:
एंजाइम इम्यून ऐसी (ईआईए):यह टेस्ट एंटीबाडी एचआईवी के लिए होता है। इसकी कुछ सीमा होती हैं। इंफेक्शन के 6-12 हफ्तों के भीतर कुछ लोग एंटी-एचआईवी का उत्पादन करना शुरु कर देते हैं लेकिन कुछ लोगों में इसके लिए 6 महीने लग जाते हैं। यह टेस्ट नए इंफेक्शन के लिए उपयोगी नहीं होते हैं।

एंजाइम लिंक्ड इम्युनोसौरबैंट एसे:यह टेस्ट ईआईए की तरह होता है। इस टेस्ट में ईआईए से अलग सामग्री और टेक्निक का इस्तेमाल किया जाता है। [ये भी पढ़ें: जानिए क्या है मोलस्कम कन्टेजियोसम]

पोलीमरेज चेन रिएक्शन:इस टेक्नॉलोजी से खून में आरएनए(राइबोज न्यूक्लिक एडिस) को बढाते हैं। इसका मतलब यह है कि इससे आरएनए की कई प्रतियां बनाते हैं। इससे आरएनए को आसानी से जांच करने में मदद मिलती है। अगर किसी व्यक्ति में नया संक्रमण हुआ है तो पोलीमरेज चेन रिएक्शन वायरस की थोड़ी मात्रा से भी जांच करने में मदद करता है। हालांकि यह काफी महंगा होता है और आसानी से उपलब्ध होता है।

एचआईवी टेस्ट के प्रकार और पुष्टि के लिए किया जाने वाले टेस्ट:
वेस्टर्न ब्लोट:यह प्राइमरी टेस्ट के परिणाम की पुष्टि के लिए किया जाता है। यह एक एंटीबॉडी टेस्ट होता है। यह एचआईवी-एंटीबॉडी के ईआईए या ईएलआईएसए टेस्ट से ज्यादा विशिष्ट होता है। हालांकि यह काफी महंगा होता है इसलिए यह टेस्ट प्राइमरी की जगह कन्फर्मेशन टेस्ट के लिए प्रयोग किया जाता है।

आरआईपीए:यह ब्लड टेस्ट एंटीबॉडी के लेवल कम होने पर किया जाता है। यह वेस्टर्न ब्लोट टेस्ट के परिणाम ठीक नहीं होता है तब भी यह टेस्ट किया जा सकता है। यह टेस्ट मंहगा होता है साथ ही इसे करने में मुश्किल होती है।

इम्यूनोफ्लोरेसन्स एसे:यह भी कंफर्मेट्ररी टेस्ट का प्रकार होता है और वेस्टर्न ब्लोट टेस्ट से पुष्टि ना होने पर किया जाता है। कभी-कभी यह टेस्ट वेस्टर्न ब्लोट और ईएलआईएसए टेस्ट की जगह भी किया जाता है।

डीएनए/आरएनए एमप्लीकेशन टेस्ट:यह टेस्ट पीसीआर की तरह होता है। यह वेस्टर्न ब्लोट टेस्ट से पुष्टि ना होने पर किया जाता है। इस टेस्ट का इस्तेमाल व्यक्ति के वायरल लोड को निर्धारित करने के लिए किया जाता है। वायरल लोड रक्त में मौजूद वायरस की मात्रा होती है। आमतौर पर वायरल लोड टेस्ट का प्रयोग एचआईवी की जांच के लिए नहीं किया जाता है। बल्कि आपका इलाज कितना प्रभावी है उसकी जांच के लिए किया जाता है। कुछ रिसर्च के अनुसार एचआईवी के पता लगने के बाद वायरल लोड टेस्ट करने से डॉक्टर को इलाज करने में मदद मिलती है। [ये भी पढ़ें: एचआईवी और यौन संचारित रोगों में होता है गहरा संबंध]

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