सिफलिस है एक घातक यौन संचारित रोग

syphilis is a dangerous sexually transmitted disease

सिफलिस बहुत ही घातक यौन संचारित रोगों में से एक है। यह बीमारी मुख्यत:ओरल सेक्स (मुख मैथुन) और एनल सेक्स (गुदा मैथुन) के कारण फैलता है। यह एक संक्रामक बीमारी है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। यह मुख्य रूप से ट्रीपोनीमा पैलिडम नामक जीवाणु से फैलता है। सिफलिस बीमारी का परीक्षण सीरोलोजिकल के द्वारा किया जाता है। इस रोग की तीन अवस्थाएं होती है। एक सर्वे के अनुसार भारत में सलाना एक लाख लोग सिफलिस से ग्रसित होते हैं। सिफलिस के दो मुख्य प्रकार होते हैं- प्राइमरी सिफलिस और सेकंडरी सिफलिस।

सिफलिस के कारण:
ट्रीपोनीमा पैलिडम नामक जीवाणु के कारण फैलने वाले इस यौन संचारित रोग का मुख्य कारण संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाना है। संक्रमित व्यक्ति से यौन संबंध बनाते समय यह रोग दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है। यह जीवाणु त्वचा में मौजूद सूक्ष्म छेदों से दूसरे व्यक्ति की त्वचा में प्रवेश करता है, जिसके बाद यह एक निश्चित समय के अंतराल के बाद अपना असर दिखाने लगता है। इसको विकसित होने में 21 दिनों का समय लगता है।
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प्राइमरी सिफलिस के लक्षण:
प्राइमरी सिफलिस एक तरह से सिफलिस के कारण एक या दो फोड़े त्वचा पर होने लगते हैं यह शुरुआत में छोटे और दर्द रहित होते हैं। यह मुंह के आस पास होने लगते हैं और इनके 10 से 90 दिनों तक रहने की संभावना होती है। इसका सही से इलाज नहीं करवाने पर यह ज्यादा दिनों तक भी हो सकता है। यह दिखने में त्वचा से सम्बन्धित रोग लगता है मगर असल में यह यौन संचारित रोग का ही एक प्रकार है जिसका जल्द से जल्द इलाज करवाना बहुत जरुरी होता है।

सेकंडरी सिफलिस के लक्षण :
प्राइमरी सिफलिस के मुकाबले सेकेंडरी सिफलिस में त्वचा को कम नुकसान होता है। यह संक्रमण एक से दो महीनों से लेकर छः महीनों तक रहता है। जिन लोगों को सेकंडरी सिफलिस होता है उनकी हथेलियो और पैरों के तलवों पर गुलाबी दाने होने लगते हैं। कभी कभी यह दाने मुंह में होने लगते हैं इसके साथ ही मुंह की ग्रंथियों में सूजन होने लगता है इसके अतिरिक्त इसके मरीजो में वजन कम होने की भी शिकायत देखने को मिलती है। इसके अलावा इसके दो अन्य प्रकार भी हैं- लेटेन्ट सिफलिस और ट्रेट्री सिफलिस।

लेटेन्ट सिफलिस:
लेटेन्ट सिफलिस के अंतर्गत इसमें त्वचा में निष्क्रिय संक्रमण होते हैं।

ट्रेट्री सिफलिस:
अगर सिफलिस का इलाज ठीक से नहीं किया जाए तो यह बढ़ जाता है और इससे बहुत से अन्य समस्याएं भी होने लगती है। इसके कारण दिल और दिमाग पर इसका असर होने लगता है। इसके अलावा पक्षाघात, अंधापन, पागलपन, बहरापन, नपुंसकता जैसी घातक बीमारिया होने लगती है। इसे ट्रेट्री सिफलिस कहते हैं।

सिफलिस का इलाज संभव है:
इसका इलाज बिल्कुल सम्भव है। इसके लिए सबसे पहले मरीज को अपने खून की जांच करवानी जरुरी होती है। उसके बाद डॉक्टर की सलाह पर ही दवाइयां लेनी चाहिए। इसके लिए डॉक्टर कम से कम एक साल तक कुछ खास प्रकार की दवाइयों को खाने के लिए कहता है। अगर यह बीमारी विकराल रूप ले लेती है तो उसके लिए मरीज को इन दवाइयों को और ज्यादा वक्त खाने की सलाह दी जाती है। [ये भी पढ़ें: यौन संचारित रोगों के उपचार के लिए अपनाएं ये तरीके] 

सिफलिस के लिए सावधानियां:
इसके लिए आपको मुख्य रूप से दो सावधानियां बरतनी चाहिए-

  • उस व्यक्ति से दूर रहे जिसको इस प्रकार का संक्रमण हो।
  • अगर आप यह नहीं जानते हैं कि आपके साथी को इस तरह का कोई इन्फेक्शन है भी या नहीं, तो सेक्स करते समय कंडोम का प्रयोग करना ना भूले।
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