वर्ल्ड एड्स डे: एच.आई.वी एड्स से जुड़ें मिथक

myths about HIV aids

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यौन संचारित रोगों में से एक एच.आई.वी/एड्स सबसे ज्यादा घातक बीमारियों में से एक है। एच.आई.वी. एक वायरस है जिसका पूरा नाम- ह्यूमन इम्युनोडेफिसियेंसी वायरस है। जो सीधा मरीज के इम्यून सिस्टम पर हमला करता है। हमारा इम्यून सिस्टम हमारे शरीर को बाहरी इन्फेक्शन, वायरस आदि से बचाता है। यह हमारे इम्यून सिस्टम में मौजूद श्वेत रक्त कोशिका जिसे टी-हेल्पर सेल कहते हैं। एचआईवी टी हेल्पर सेल्स को ख़त्म कर अपने आप को इसके यहां स्थापित कर देता है। जब यह वायरस आपके शरीर के इम्यून सिस्टम को पूरी तरह नष्ट कर देता है तो यह अवस्था एड्स (एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसियेंसी सिंड्रोम) कहलाती है। भारत में हर साल 1 लाख लोग इस वायरस से ग्रसित होते हैं। इस यौन संचारित रोग को लेकर लोगों में बहुत से भ्रम हैं जिसके कारण इससे बहुत से मिथक समाज में प्रचलित हो गई हैं। आइए इस बीमारी से जुड़े मिथकों और उनकी सत्यता के बारे में जानतें हैं।

मिथक 1: जिन लोगों को एच.आई.वी होता है उनके आस-पास रहने से भी यह वायरस फैलता है।

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ज्यादातर लोगों की एच.आई.वी के बारें में यह सोच है कि जिस व्यक्ति को एच.आई.वी होता है उनके आस-पास रहने से उन्हें यह बीमारी हो सकती है। लेकिन ऐसा नहीं है एच.आई.वी छूने से, उस व्यक्ति के साथ खाना खाने में, उससे हाथ मिलाने में और उसके पसीने या अन्य किसी भी प्रकार से संपर्क में आने पर नहीं फैलता हैं। इनमें से किसी भी कारण से यह वायरस नहीं फैलता है-

  • एक ही हवा में सांस लेने से नहीं* फैलता है।
  • एक ही शौचालय के प्रयोग* से यह नहीं फैलता है।
  • एक गिलास में पानी पिने से या एक साथ खाना खाने से भी यह नहीं फैलता है।
  • यह मां के दूध से, यौन संबंधो से, संक्रमित रक्त के इस्तेमाल से फैलता है।

मिथक 2: एच.आई.वी/एड्स इलाज संभव है :
एच.आई.वी/एड्स का इलाज संभव नहीं हैं, इसके इन्फेक्शन को ज्यादा समय तक ठीक रखा जा सकता है, लेकिन इसका पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है।

मिथक 3: एचआईवी/ एड्स एक समलैंगिक बीमारी है।
लोगों में एचआईवी/ एड्स को लेकर यह भी अवधारणा है कि यह एक समलैंगिक बीमारी है, लेकिन यह महिला या पुरुष दोनों में से किसी भी संक्रमित व्यक्ति को हो सकता है। [ये भी पढ़ें: क्या है ह्यूमन पैपिलोमा वायरस और कैसे बचा जाए इसके संक्रमण से]

मिथक 4: जिसे एचआईवी/ एड्स होता है उसका जीवन खत्म हो जाता है:
जिन लोगों में यह वायरस पाया जाता है उनके मन में एक अवधारणा होती है कि उनका जीवन खत्म हो चुका है, लेकिन ऐसा नहीं है जिसको भी यह बीमारी होती है वह एक सामान्य जीवन व्यतीत कर सकतें है। बस उनको सावधानियां बरतनी पड़ती है।

मिथक 5: जो समलैंगिक नहीं होते हैं और नसों में इंजेक्शन लेते हैं उनमें एचआईवी/ एड्स नहीं फैलता है:
एचआईवी/ एड्स को लेकर एक यह मिथक है कि अगर आप समलैंगिक नहीं है और आप नसों में इंजेक्शन लेते हैं, तो आपको यह बीमारी नहीं हो सकती है। मगर यह अवधारणा सत्य नहीं है यह बीमारी जैसा की ऊपर बताया गया है किसी भी संक्रमित महिला या पुरुष के साथ यौन सम्बन्ध स्थापित करने से भी हो जाता है और साथ ही साथ संक्रमित इंजेक्शन का इस्तेमाल करने से भी एचआईवी/ एड्स फैलता है।

मिथक 6: ओरल सेक्स से एचआईवी/ एड्स नहीं फैलता है:
ओरल सेक्स, सेक्स के अन्य प्रकार से थोड़ा कम जोखिम भरा होता है जिससे कि इन्फेक्शन उतना नहीं फैलता है लेकिन यह अवधारणा गलत है कि इससे एचआईवी/ एड्स नहीं फैलता है।

मिथक 7: मच्छरों से एचआईवी/ एड्स फैलता है:

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एचआईवी/ एड्स एक ऐसी बीमारी है जो खून में संचारित होने के कारण फैलती है। लोगों में इस बात कि बहुत ज्यादा चिंता रहती है कि किसी ही जानवर के काटने या मच्छर के काटने से यह वायरस फैलता है। लेकिन एचआईवी/ एड्स इस तरीके नहीं फैलता है।

मिथक 8: अपने साथी को नहीं बताना चाहिए:
एचआईवी/ एड्स के लक्षणों का पता चलते-चलते साल बीत जाता है, इस कारण जिन लोगों में यह वायरस पाया जाता है वह इसके बारें में अपने साथी या अन्य किसी व्यक्ति को नहीं बतातें हैं। जो ठीक नहीं है। इस बीमारी की पुष्टि हो जाने के बाद अपने साथी को जरूर बताएं ताकि वह इससे जुड़ी सावधानियों पर ध्यान दे सके। [ये भी पढ़ें: इन आसान घरेलू उपायों से दूर करें जेनाइटल वार्ट्स को]

मिथक 9: अगर कोई एचआईवी/एड्स का इलाज करवा रहा है तो यह वायरस किसी अन्य लोगों में नहीं फैलता है:
लोगों में यह अवधारणा होती है कि अगर वह इसका इलाज करवा रहें हैं तो यह वायरस किसी अन्य व्यक्ति में नहीं फैलेगा लेकिन ऐसा नहीं है, जो भी व्यक्ति इससे संक्रमित है उसके साथ यौन संबन्ध स्थापित करने में, उसके द्वारा प्रयोग किये गए इंजेक्शन से और उसके संक्रमित रक्त से भी यह फैलता है फिर चाहे वह व्यक्ति इलाज करवा ही क्यों न करावा रही हो।

मिथक 10: एचआईवी/एड्स पॉजीटिव व्यक्ति दवाइयों से ठीक हो सकता है:
यह भी एक बड़ा मिथक है। एंटी वायरस इस बीमारी से लड़ने की क्षमता को बढाता है और इससे पीड़ित व्यक्ति के जीवनकाल बीमारी के मुकाबले बढाता है, यह दवाइयां बहुत ही महंगी होती है और साथ ही इसके बहुत ज्यादा साइड इफेक्ट भी देखने को मिलते हैं। अभी तक मेडिकल साइंस एड्स का इलाज नहीं ढूंढ सका है।

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