क्लैमाइडिया के बारे में गलत जानकारी बन सकती है आपके लिए मुसीबत

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क्लैमाइडिया एक यौन संचारित रोग है जिसे आमतौर पर क्लैमाइडिया बैक्टीरियल इन्फेक्शन भी कहा जाता है। यह इन्फेक्शन ट्राकोमोटिस जीवाणु के कारण फैलता है। भारत में एक साल में लगभग एक लाख के करीब लोग इस बीमारी से प्रभावित होते हैं। जिनमें से 75 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। यह बीमारी कई बार मां से बच्चे में भी हो सकती है जिसकी वजह से बच्चे को निमोनिया का खतरा रहता है। लोगों के बीच क्लैमाइडिया को लेकर बहुत सी गलत जानकारी या मिथक फैले हुए हैं। जानकारी के अभाव में लोग इस बीमारी की गिरफ्त में आ जाते हैं।

मिथक 1: क्लैमाइडिया अपने आप ठीक हो जाता है इसके लिए कुछ करने की जरूरत नहीं होती है।
know about the myths related with chlamydiaतथ्य: यह मिथक बहुत ही खतरनाक हो सकता है अगर आप ऐसा सोचते हैं कि क्लैमाइडिया को किसी उपचार की जरूरत नहीं है और यह अपने आप ठीक हो जाएगा तो ऐसा नहीं है। जब भी आपको इसके लक्षण दिखें तो उन्हें अपने डॉक्टर के साथ साझा करें और इसका जल्द से जल्द उपचार करवाएं। महिलाओं में इसका इलाज न करवाने पर यह पेल्विक इंफ्लेमेट्री डिजीज(पीआईडी) का रूप ले सकता है, जिसके कारण बांझपन की समस्या हो सकती है। [ये भी पढ़ें: जानें कैसे और क्यों होता है जेनाईटल हर्पीस] 

मिथक 2: अगर आपको क्लैमाइडिया हो चुका है तो दोबारा नहीं होगा।
तथ्य: ज्यादातर लोगों का मानना है कि अगर उन्हें एक बार क्लैमाइडिया हो जाए तो वह इस बीमारी के लिए इम्यून हो चुके हैं यानी अब दोबारा उनको यह बीमारी नहीं होगी। यह सरासर गलत है। अगर आप सही तरीका नहीं अपनाते हैं और गलत तरीके से सेक्स करते हैं तो आपको यह बीमारी दोबारा भी हो सकती है। इसलिए बेहद जरूरी है कि आप कंडोम का इस्तेमाल करें और ओरल या एनल सेक्स करने से बचें।

मिथक 3: ओरल या एनल सेक्स के माध्यम से क्लैमाइडिया नहीं होता है क्योंकि ये सुरक्षित है।
तथ्य: ये बात सच है कि ज्यादातर यौन संचारित रोग वेज़ाइनल सेक्स(योनि सेक्स) के जरिये ज्यादा फैलते हैं। मगर इसका यह मतलब नहीं है कि ओरल सेक्स या एनल सेक्स सुरक्षित है। दोनों ही सूरतों में अगर इसे सुरक्षित रूप से नहीं करेंगे तो आपको उसके साइड इफैक्ट देखने को मिल सकते है, क्लैमाइडिया उन्हीं में से एक है। सुरक्षित रूप से सेक्स करने के लिए सबसे अच्छा साधन है कंडोम जिसका प्रयोग किसी भी तरह के सेक्स के समय करना चाहिए।

मिथक 4: पहली बार सेक्स करने से क्लैमाइडिया नहीं होता है।
तथ्य: लोगों में एक मिथक यह भी है कि अगर वह पहली बार सेक्स करते हैं तो उन्हें क्लैमाइडिया नहीं हो सकता है लेकिन ऐसा जरुरी नहीं है। अगर आपके साथी को यह समस्या है तो आपको क्लैमाइडिया के होने की संभावना 30 प्रतिशत होता है। यह पहली बार में भी फ़ैल सकता है। इसलिए आपको सेक्स के समय सही प्रोटेक्शन की जरूरत होती है। [ये भी पढ़ें: पेट में हद से ज्यादा दर्द हो सकता है हेपेटाइटिस-सी का लक्षण] 

मिथक 5: अगर आप एक से ज्यादा लोगों के साथ संबंध नहीं बनाते तो आपको क्लैमाइडिया की जांच की जरूरत नहीं है।
तथ्य: यह बात सही है कि दूषित शौचालय के प्रयोग से बहुत सी बीमारियां होती है, लेकिन यह बात गलत है कि क्लैमाइडिया दूषित शौचालय के इस्तेमाल से फैलता है। यह बीमारी सिर्फ और सिर्फ गलत तरह से सेक्स करने और सम्बन्ध बनाने के कारण होती है।

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