लिंफोग्रेनुलोमा वेनेरेम के बारे में जानिए कुछ आवश्यक बातें

know about lymphogranuloma venereum disease

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लिंफोग्रेनुलोमा वेनेरेम एक यौन संचारित रोग है जो जननांग क्षेत्र की लसीका ग्रंथियों से जुड़ा संक्रमण होता है। यह क्लैमाइडिया बैक्टीरिया में तनाव के कारण होता है। पुरूषों में यह बीमारी ज्यादा कॉमन है। यह विशेषकर उन पुरुषों में होता हैं जो पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाते हैं। डॉक्टर लिंफोग्रेनुलोमा वेनेरेम इलाज के लिए एंटीबायोटिक लेने की सलाह देते हैं।

लिंफोग्रेनुलोमा वेनेरेम के कारण:
लिंफोग्रेनुलोमा वेनेरेम वेजाइनल, ओरल और एनल सेक्स के दौरान होता है। यह लिम्फैटिक वाहिकाओं में सूजन के कारण होता है। साथ ही इसमें शरीर में बैक्टीरिया के घुसने वाली जगह पर सूजन और फफोले हो जाते हैं। [ये भी पढ़ें: जाने कैसे बच्चों में फैलता है एचआईवी एड्स का संक्रमण] 

लिंफोग्रेनुलोमा वेनेरेम के लक्षण:

पहला स्टेज-
शुरुआत के 3 दिनों में प्रवेश के स्थल पर त्वचा पर छोटे-छोटे घाव होने लगते हैं। मगर यह फटने के बाद बहुत जल्दी ठीक हो जाते हैं जिसका पता ही नहीं चल पाता है।

दूसरी स्टेज-
यह 2-4 हफ्तों के बाद पुरुषों में शुरु होती है। लिम्फ नोड्स के एक या दोनों तरफ बड़ी गिलटी हो जाती है। गिलटी गहरे ऊतकों से छिपकी रहती हैं जिससे सूजन आ जाती है और कभी -कभी बुखार भी आ जाता है। महिलाओं में कमर में दर्द होना आम होता है। शुरुआत में यह गर्भाशय ग्रीवा या वेजाइना के ऊपर होते है जिससे लिम्फ नोड्स में सूजन आ जाती है। बहुत सारे साइनस विकसित हो जाने के कारण सूजन आती है और त्वचा पर घाव आ जाते हैं।

तीसरा स्टेज-
घाव ठीक हो जाते हैं मगर साइनस दोबारा हो सकते हैं। संक्रमण के कारण लगातार सूजन लसीका वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं जिससे सूजन और त्वचा पर घाव होते हैं। लिंफोग्रेनुलोमा वेनेरेम में सिर दर्द, बुखार, थकावट भी होती है। इसके साथ ही फेफड़ों, लीवर और जोड़ो में भी इसके लक्षण नजर आते हैं। जो लोग एनल सेक्स करते हैं उनके रैक्टम से खून भी बहने लगता है।

जटिलताएं:
अगर लिंफोग्रेनुलोमा वेनेरेम का इलाज ना किया जाए तो जननांगों में ज्यादा सूजन आ जाती है। महिलाओं में लिम्फ नोड्स में सूजन बांझपन का कारण हो सकती है। लिंफोग्रेनुलोमा वेनेरेम का इलाज ना करने से दिमाग और लीवर पर भी सूजन आ सकती है।

टेस्ट:
लिंफोग्रेनुलोमा वेनेरेम का टेस्ट इसके लक्षण पर निर्भर करते हैं लेकिन इसकी पुष्टि करने के लिए लैब का टेस्ट जरुरी है।

इलाज:
लिंफोग्रेनुलोमा वेनेरेम का इलाज एंटीबायोटिक से किया जा सकता है। अगर आपको लिंफोग्रेनुलोमा वेनेरेम है तो आपको पिछले दो महीनों में जिसके साथ सेक्स किया हो उनसे पूछना चाहिए कि कहीं उनको यह इंफेक्शन तो नहीं है। [ये भी पढ़ें: एड्स से जुड़ी कुछ खास बातें जिन्हें जानना है आवश्यक] 

संक्रमण से कैसे बचें:
फिर से संक्रमण से बचने के लिए आपको एंटीबायोटिक लेने के 7 दिन तक सेक्स नहीं करना चाहिए। जब तक आपके पार्टनर का ट्रीटमेंट खत्म ना हो जाए तब तक सेक्स नहीं करना चाहिए। डॉक्टर के द्वारा बताई गई दवाई का समय पर लेना जरुरी होता है। अगर आपने ट्रीटमेंट के दौरान एक दिन दवाई ना ली हो या सेक्स किया तो इससे यह ठीक भी नहीं होता है और आपके पार्टनर को लिंफोग्रेनुलोमा वेनेरेम होने के खतरा बढ़ जाता है। दवाई मिस हो जाने के बाद अपने डॉक्टर से जरुर मिलें ताकि वह आपको इलाज के फायदे बता सके।

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