जानिए एंडोमेट्रिओसिस से जुड़ी कुछ अहम बातें

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एंडोमेट्रिओसिस के महिलाओं को होने वाली एक बीमारी है। एंडोमेट्रिओसिस एक ऐसी अवस्था है जिसमें एंडोमेट्रियम कोशिकाएं बनती हैं और गर्भाशय के बाहर फैल जाती हैं। एंडोमेट्रियल कोशिकाएं सिर्फ गर्भाशय के बाहरी हिस्से में लाइन में होनी चाहिए और कहीं और फैली नहीं रहनी चाहिए। जिन महिलाओं को बांझपन की समस्या होती है उनमें ज्यादातर एंडोमेट्रिओसिस से पीड़ित होती हैं। एक सर्वे के मुताबिक करीब 30 से 40% महिलाएं जिनमें बांझपन की समस्या पाई जाती है को एंडोमेट्रिओसिस होता है।

एंडोमेट्रिओसिस के लक्षण:

1.बांझपन:
एंडोमेट्रिओसिस के कारण अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब और आंत में इंफेक्शन फैल सकता है। एंडोमेट्रिओसिस के कारण महीने में कई बार पीरियड्स हो सकते हैं, जो आपके गर्भाशय के लिए हानिकारक होता है। यह आपके प्रजनन तंत्र( रिप्रोडक्टिव सिस्टम) को भी खराब कर सकता है, जिसके कारण आपको बांझपन जैसी परेशानी का सामना करना पड़ता है। [ये भी पढ़ें: ये लक्षण करते हैं यौन संचारित रोगों की तरफ इशारा]

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2.सेक्स के दौरान काफी दर्द होना:
एंडोमेट्रिओसिस की वजह से पेल्विक एरिया और उसके आसपास वाले हिस्सों में दर्द होता है। ऐसा आमतौर पर महिलाओं के साथ होता है। योनिमुख तीन हिस्सों में बंटा होता है लेबिया मेजोरा, लेबिया माइनोरा और क्लेटोरिस। सेक्स के दौरान किसी महिला को योनि में दर्द होने की समस्या को डिस्पेरुनिया कहते हैं।

3.पीरियड्स के दौरान दर्द होना:
इसके प्राथमिक लक्षणों में पीरियड्स के दौरान तेज दर्द शामिल है। कुछ महिलाओं में मांसपेशियों में खिंचाव की परेशानी आती है। यह दर्द आमतौर पर पीरियड्स में होने वाले दर्द से अधिक होता है और समय के साथ दर्द बढ़ने लगता है। पीरियड्स से पहले मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द शुरू हो सकता है, जो पीरियड्स के बाद भी बना रहता है और शरीर के निचले हिस्से को पूरी तरह जकड़ लेता है। ऐसी स्थिति में, मल या मूत्र त्याग में भी समस्या आती है।

एंडोमेट्रिओसिस के कारण:
1. प्रजनन अंगों और केविटीज की परत एम्ब्रोनिक कोशिकाओं से बनती है। जब उस परत का छोटा हिस्सा एंडोमेट्रियल टिशू में बदल जाता है तो एंडोमेट्रिओसिस की समस्‍या होती है।
2.इम्‍यून सिस्‍टम में समस्या आने से, शरीर गर्भाशय से बाहर बढ़ने वाले एंडोमेट्रियल टिश्यू को बाहरी तत्व मानकर नष्ट करने लगते है।
3.ब्‍लड सेल्‍स या टिश्यू के तरल, एंडोमेट्रियल कोशिकाओं के शरीर के अन्य भागों में फैलने के कारण भी बन सकते हैं। [ये भी पढ़ें: यौन संचारित रोगों में सबसे ज्यादा घातक है क्लैमाइडिया] 


एंडोमेट्रिओसिस के उपचार:

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केस हिस्ट्री, टेस्‍ट और सोनोग्राफी से एंडोमेट्रिओसिस की समस्‍या का पता लगाया जा सकता है। कई बार लैप्रोस्कोपी की मदद से भी इस बीमारी का पता लगाने के साथ ही इसका इलाज भी किया जा सकता है। इसके लिए पेट पर 2-3 छोटे कट लगाकर कैमरा और अन्य उपकरण की मदद से पेल्विक के अंदर एंडोमेट्रियॉटिक हिस्सों को हटाया या लेजर की मदद से इसे जला दिया जाता है। हालांकि सर्जरी के बाद इसके फिर से उभरने की आशंका बनी रहती है और कुछ मरीजों को मल्टीपल सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है। मेडिकल ट्रीटमेंट से आर्टिफिशियल मेनोपॉज के जरिये एंडोमेट्रिओसिस को रोका जा सकता है। इसके लिए हार्मोंनल दवाइयां या महीने में एक इंजेक्शन काफी होता है। हालांकि यह पक्का इलाज नहीं है और इसके साइड इफेक्ट हो सकते हैं। अगर मरीज की उम्र ज्यादा है और कई सर्जरी हो चुकी हैं, तो गर्भाशय और ओवरीज निकालकर हिस्टेरेक्टॉमी ही इसका सबसे बेहतर इलाज है।

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