एचआईवी और यौन संचारित रोगों में होता है गहरा संबंध

how HIV aids and other sexually transmitted diseases are connected

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आमतौर से माना गया है कि यौन संचारित रोग व्यक्ति में एचआईवी के खतरे को बढ़ाता है। इसके जैविक और व्यावहारिक दोनों कारण हैं। सिफलिस और गोनोरिया जैसे यौन संचारित रोग ना केवल एचआईवी को आसानी से शरीर के ऊतकों और कोशिकाओं दोनों को नुकसान पहुंचाने के लिए मार्ग प्रदान करते हैं बल्कि इसके साथ व्यक्ति में एचआईवी की संक्रामकता को बढ़ाते हैं। जिससे शरीर में बाकि वायरस के नुकसान पहुंचाने की संभावना बढ़ जाती है। तो आइए आपको बताते हैं किस तरह से यौन संचारित रोग एचआईवी की संवेदनशीलता में वृद्धि करते हैं।

1-कुछ यौन संचारित रोगों से जंननाग के हिस्से में घाव हो जाते हैं। यह घाव कभी दिखते हैं और कभी नहीं दिखाई देते हैं लेकिन इससे एचआईवी को सीधे खून में मिलने का मार्ग प्रदान होता है और इससे ग्रसित होने की संभावना बढ़ जाती है। [ये भी पढ़ें: यौन संचारित रोगों की रोकथाम के लिए रखें इन बातों का ध्यान]

2- कुछ यौन संचारित रोगों में यह घाव दिखाई नहीं देते हैं लेकिन यह शरीर में इंफेक्शन की वजह से जननांग क्षेत्र में सीडी-4 कोशिकाओं की एकाग्रता को बढ़ा देते हैं। कोशिकाओं की एकाग्रता की वजह से एचआईवी हो जाता है।

3-यौन संचारित रोगों से ग्रसित लोगों के सेमिनल और वजाइनल तरल में एचआईवी की सांद्रता में वृद्धि हो जाती है। जिससे एचआईवी संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। एक स्टडी के मुताबिक एचआईवी और गोनोरिया से ग्रसित पुरुषों में सिर्फ एचआईवी से ग्रसित की तुलना में 10 गुना ज्यादा वीर्य संक्रमित होता है। क्लैमाइडिया से महिलाओं में एचआईवी होने का खतरा बढ़ जाता है।

यौन संचारित रोगों की स्क्रीनिंग और उपचार के लाभ:
1- यौन संचारित रोगों का पता चलने के बाद व्यक्ति को जल्द से जल्द इसका इलाज करवाना शुरु कर देना चाहिए। इंफेक्शन का इलाज होने से एचआईवी के संचरण का खतरा भी कम हो जाता है।
2-हर्पीज से ग्रसित लोग आसानी से एचआईवी के शिकार हो जाते हैं। अगर किसी व्यक्ति को हर्पीज है तो उन्हें टेस्ट करवाना चाहिए कि कहीं वह एचआईवी से ग्रसित तो नहीं हैं। अगर ग्रसित नहीं है तो एचआईवी के इंफेक्शन से खुद को बचाना चाहिए।

3- एक स्टडी के मुताबिक अगर कोई यौन संचारित रोग और एचआईवी से ग्रसित है तो जेनिटल हर्पीज के ट्रीटमेंट से दोनों रोगों की रोकथाम में मदद की जा सकती है।

4-एक रिसर्च के मुताबिक यौन संचारित रोगों की थैरेपी में एचआईवी पॉजिटिव लोगों के वायरस ट्रीटमेंट ना करने की तुलना में कम वायरस बाहर निकलते हैं।

5- यौन संचारित रोग की थैरेपी के साथ काउंसलर का परामर्श लेने से व्यक्ति एचआईवी से ग्रसित नहीं होता है। साथ ही इससे एचआईवी होने का खतरा भी कम हो जाता है।

ज्यादातर लोग एचआईवी की रोकथाम और उपचार के समय पर ही एचआईवी पर ध्यान केंद्रित करते हैं लेकिन तथ्य यह है कि अगर कोई व्यक्ति एचआईवी की रोकथाम की दवाई ले रहा हो या एंटीरेट्रोवायरल थैरेपी कर रहा हो तो यौन संचारित रोग एचआईवी के संचरण के खतरे को बढ़ा सकता है। [ये भी पढ़ें: ये टेस्ट बताते हैं कि आप एचआईवी पॉजिटिव हैं या नहीं]

आइए आपको यौन संचारित रोग और एचआईवी से संबंधित कुछ प्वाइंट बताते हैं जो आपको हमेशा याद रखने चाहिए।

  1. अगर आप यौन संचारित रोग से ग्रसित हैं तो आपको एचआईवी से ग्रसित होने का खतरा बढ़ जाता है।
  2. यौन संचारित रोग और एचआईवी से ग्रसित व्यक्ति के शरीर में वायरस फैलने की संभावना बढ़ जाती है।
  3. यौन संचारित रोगों के ट्रीटमेंट एचआईवी फैलने की संभावना को कम देता है।
  4. एचआईवी की थैरेपी से दूसरे यौन संचारित रोगों का खतरा कम हो जाता है।
  5. कंडोम के इस्तेमाल से यौन संचारित रोग और एचआईवी का खतरा कम हो जाता है।
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