वर्ल्ड एड्स डे: जाने कैसे बच्चों में फैलता है एचआईवी एड्स का संक्रमण

How children get infected with HIV aids

एच.आई.वी./एड्स का प्रकोप पूरे विश्व में फैल चुका है। यह बीमारी किसी लिंग विशेष या उम्र को अपना निशाना नहीं बनाती है बल्कि इसका शिकार बच्चे, बूढ़े, महिला, पुरुष कोई भी हो सकता है। यहां तक की बच्चे भी इस लाइलाज बीमारी के शिकार हो जाते हैं। 2005 में यूनिसेफ द्वारा किये गए एक सर्वे के अनुसार हर 14 सेकेंड में एक बच्चे को एच.आई.वी. एड्स होता है। 2008 में पूरे विश्व में एच.आई.वी. एड्स के 21 लाख मामले समाने आये और 15 साल से कम उम्र के बच्चों की भारत में यह संख्या 70 हजार की थी। इनमें 21 हजार बच्चों को यह बीमारी उनकी मां से उनके जन्म के साथ ही हो जाता है। वहीं यूनिसेफ द्वारा एक और सर्वे में यह पाया गया कि अफ्रीका के एक क्षेत्र में 80% बच्चे एच.आई.वी./एड्स जैसी घातक बीमारी से ग्रसित हैं।

बच्चों में एच.आई.वी./एड्स के कारण:
ज्यादात्तर बच्चों में एच.आई.वी. एड्स उनकी मां से होता है। यह तब फैलता है जब बच्चा मां के गर्भ में होता है, इसके अलावा इस बीमारी के बच्चे के जन्म के साथ भी होने की संभावना होती है। इस बीमारी का वायरस एच.आई.वी बच्चे के इम्यून सिस्टम में प्रवेश करता है। उसके बाद यह वायरस इम्यून सिस्टम में श्वेत रक्त कोशिकाओं को खत्म कर देता है जिसे कि रक्त के जरिए ये वायरस पूरे शरीर में फैलने लगता है। इसके अलावा यह बच्चों में संक्रमित खून, संक्रमित इंजेक्शन से भी बच्चों में फैलता है। [ये भी पढ़ें: जाने कैसे थायरायड की समस्या यौन रोग से जुड़ी है] 

 में एच.आई.वी. एड्स के लक्षण:

How children get infected with HIV aids इसके लक्षण ज्यादातर बच्चों में नजर नहीं आते हैं, यह लक्षण उम्र बढ़ने के साथ नजर आने लगते हैं इसमें से कुछ आम लक्षण है जो इस प्रकार हैं –
* जिन बच्चों में एच.आई.वी. एड्स की शिकायत होती है उनका वजन घटने लगता है।
* यह बच्चों एक दिमाग पर असर डालता है जिससे बच्चों में मिर्गी और दौरे की शिकायत होने लगती है।
* पैदाइशी रूप से जब बच्चों में ये बीमारी होती है तो बच्चों के कानों में इन्फेक्शन, सर्दी, पेट में दर्द और डायरिया जैसी बीमारियों की शिकायत होने लगती है।
जब बच्चों की बढ़ती उम्र के साथ यह बीमारी भी पहले से एडवांस हो जाती है, उस समय यह बच्चों के इम्युन सिस्टम में और ज्यादा असर करने लगता है। उनके लक्षण इस प्रकार है-
*निमोनिया होना, फेफड़ो में फंगल इन्फेक्शन होगा।
*बच्चों में यीस्ट इन्फेक्शन होने लगता है।

उपचार:
How children get infected with HIV aids बच्चों को बड़ों के मुकाबले अधिक उपचार की जरूरत होती है। इनका उपचार करना बड़ों के मुकाबले ज्यादा मुश्किल होता है। कुछ एंटीबायोटिक्स ऐसे होते हैं जो तरल नहीं होते हैं। यह मुश्किल तब पैदा कर देता है जब यह दवाइयां उन नवजात बच्चे को देनी पड़ती है जो केवल तरल रूप से ही खा सकतें है। [ये भी पढ़ें: लिंफोग्रेनुलोमा वेनेरेम के बारे में जानिए कुछ आवश्यक बातें] 

बच्चो को एच.आई.वी. एड्स के साथ कैसे जीवन बिताना चाहिए:
एच.आई.वी. एड्स से पीड़ित बच्चों को बहुत सी सावधानियां बरतनी चाहिए। उन्हें अपनी दिनचर्या में बहुत ही बातों का ध्यान रखना चाहिए, स्कूल में किस तरह से बिताना है रोजाना दवाई लेना, सुबह उठ कर व्यायाम करना। बच्चों को इसके बारें में पूरी जानकारी होना जरुरी होता है। बच्चे को इस बीमारी के बारें में बताना जरुरी होता है ताकि वह जीवन को बिना किसी नकारात्मक सोच के व्यतीत कर सके।

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