जानें कैसे और क्यों होता है जेनाईटल हर्पीस

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causes and symptoms of genital herpes

हर साल भारत में औसतन 10 लाख लोगों में यौन संचारित रोग पाये जाते हैं। हर्पीस यौन संचारित रोगों का एक प्रकार है। यह बीमारी बैक्टीरियल इन्फेक्शन से होती हैं। इसमें जननांगो के आस-पास बड़े-बड़े फफोले(द्रव-भरे हुए छाले) बनने लगते है। इन फफोलों के बनने के बाद इनमें से जो तरल पदार्थ निकलता है उससे यह और अधिक बढ़ सकते हैं। यह एक संक्रामक बीमारी है, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है। यह बीमारी 14 से 49 वर्ष तक के किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। यह यौन संचारित रोग महिला और पुरुष दोनों में हो सकता है।

जेनाईटल हर्पीस होने के कारण:
हर्पीस सिंप्लेक्स वायरस (एचएसवी) के कारण जेनाईटल हर्पीस रोग फैलता है। इस वायरस के दो प्रकार होते हैं- हर्पीस सिंप्लेक्स वायरस टाइप 1 (एचएसवी-1) और हर्पीस सिंप्लेक्स वायरस टाइप 2 (एचएसवी-2)। ये दोनों वायरस श्लेष्मा झिल्ली से व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करते हैं। शरीर में प्रवेश करने के बाद ये खुद-बखुद कोशिकाओं में चले जाते हैं। यह वायरस बढ़ने की प्रवृत्ति रखता है जिसके कारण इसका उपचार करना मुश्किल होता है। संक्रमित व्यक्ति के शरीर में यह वायरस लार, वीर्य और योनि स्राव में पाया जा सकता है।

जब भी कोई संक्रमित व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के साथ सम्बन्ध स्थापित करता है तो उस समय यह वायरस दूसरे व्यक्ति के जननांगों में प्रवेश कर जाता है और त्वचा की तंत्रिका तंत्रों के जरिए फैलने लगता है। इससे जननांगों के पास छाले और फफोलों की तरह इन्फेक्शन होता है। जरुरी नहीं है जेनाईटल हर्पीस केवल त्वचा में होने वाले इन्फेक्शन के कारण हो। योनि यीस्ट संक्रमण, बैक्टीरिया संक्रमण या मूत्राशय में संक्रमण के कारण भी यह रोग हो सकता है। [ये भी पढ़ें: एड्स से जुड़ी कुछ खास बातें जिन्हें जानना है आवश्यक] 

जेनाईटल हर्पीस के लक्षण:
causes and symptoms of genital herpes इस रोग के दौरान शरीर पर फफोले और छाले जैसे घाव दिखने लगते हैं। इस तरह के संकेत आपको वायरस संक्रमण हो जाने के 2 दिन बाद या फिर 30 दिन बाद तक दिख सकते हैं। जेनाइटल हर्पीज के दौरान पुरुषों में इसके लक्षण लिंग, अंडकोश या नितंबों के आस-पास फफोले के रुप में दिख सकते हैं। जबकि महिलाओं में योनि, गुदा और नितंबों के आस पास फफोले हो सकते हैं।

पुरुषों और महिलाओं में ये सामान्य लक्षण हो सकते हैं:

  • जननांगों के पास खुजली होना, लाल पड़ जाना, फफोले होना, इसके आसपास काफी दर्द होना।
  • लिंग या योनि पर छोटे-छोटे दर्दनाक फफोले होना।
  • सिर में दर्द रहना।
  • कमर में तेज दर्द रहना।
  • बुखार, सूजन लिम्फ नोड्स और थकान सहित फ्लू।

क्या यह बीमारी फिर से हो सकती है?
ज्यादातर लोगों में यह पाया गया है कि यह बीमारी एक व्यक्ति को साल में चार से पांच बार तक हो सकती है। इसके दोबारा होने के पीछे का कारण है इसका पूरी तरह से इलाज न करवाना या इलाज में देरी करना। इसके अलावा इसके बार-बार होने के पीछे हमारा इम्यून सिस्टम भी एक कारक होता है। इम्यून सिस्टम में किसी तरह की कमी के कारण ऐसा होने की संभावना होती है।

उपचार:
causes and symptoms of genital herpes
इस रोग का इलाज वैसे तो संभव नहीं है मगर इसके लक्षणों के बारें में समय से पता चल जाए तो इसको पूरी तरह फैलने से रोका जा सकता है। इस रोग के दौरान हर्पीज और ब्लिसटर्स (फफोले) को ठीक करने के लिये एंटी-वायरल ड्रग्स दिए जाते हैं। मेडिकेशन का इस्तेमाल इस रोग के शुरुआती दिनों में किया जाता है जिससे कि इसके लक्षणों को कम किया जा सके।

देखभाल:
जेनाइटल हर्पीज के रोगी को संक्रमित हिस्से को साफ और सूखा रखने का ध्यान रखना जरुरी होता है। निम्न देखभााल के जरिए इस रोग में राहत पा सकते हैं।

क्या न करें:

  • ऐसे समय में अपने साथी को किस न करें।
  • इस बीमारी के दौरान सेक्स करने के बारे में न सोचे।
  • इन्फेक्शन वाले जगह पर हाथ लगाने पर हाथों को अच्छे से साबुन से धोए।
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