शीघ्रपतन और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या में उपयोगी योगासन

yoga postures beneficial in premature ejaculation and erectile dysfunction

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पहले की तुलना में अब यौन समस्याओं के आंकड़ों में इजाफा हुआ है। यौन समस्याएं जैसे शीघ्र पतन और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन अब लोगों में आम होने लगी हैं। ये समस्याएं जब गंभीर हो जाती है तो इनका इलाज बेहद जरुरी हो जाता है, वरना परिणाम बुरे होने की संभावनाएं बनी रहती है। किसी भी रोग से दूरी बनाये रखने के लिए जो सबसे जरुरी चीज होती है वो शरीर की देखभाल, अच्छा भोजन और नियमित व्यायाम। नियमित व्यायाम से कई सारे तरह के रोग दूर किये जा सकते हैं। योग व्यायाम भी शरीर को निरोगी रखने में काफी कारगर साबित होते हैं। योग व्यायाम के जरिये यौन समस्याएं भी दूर की जा सकती है। आज आप जानेंगे उन योगासनों के बारे में जिन्हें कर के आप यौन समस्याओं से जल्दी निजात पा सकते हैं।

1.सर्वांग आसन:

सर्वांग आसन जिसे अंग्रेजी में शोल्डर स्टैंड पोज भी कहते हैं, योग का ऐसा आसन है जो पूरे शरीर को प्रभावित करता है। यह आसन करने के लिए पीठ के बल इस तरह लेट जाएं कि हाथ शरीर के पास हो और पैर की अंगुलियां जमीन को छू जाएं। सांस लेते हुए अपने पैरों को ऊपर उठाएं, ध्यान रहे की घुटने सीधे हो। अपने हाथों से अपने कुल्हे को पकड़ ले और शरीर को जितना हो सके ऊपर उठायें। इस अवस्था में कुछ देर सांसे ले और धीरे-धीरे पैरों को जमीन पर ले आयें। [ये भी पढ़ें: खाने पीने की इन चीजों से अपने यौन स्वास्थ्य को बेहतर बनायें] 

फायदा:
नियमित रूप से ये आसन करने से काम क्षमता बढ़ती है तथा प्रजनन तंत्र को मजबूत करती है। यह आसन शरीर में रक्त संचार को बढाता है जिस से लिंग में तनाव बनता है और शीघ्र पतन और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन जैसी समस्याओं से निजात मिलता है।

2. कन्दासन:

इस आसन को करने के लिए जमीन पर पैर फैलाकर बैठ जाएं। पैरों को अब घुटनों से मोड़ ले और पैर के अगले हिस्से को हाथों से पकड़कर शरीर की तरफ खींचे। टखनों को इस तरह मोड़ें की वो छाती की तरफ हो और उन्हें वहीं रहने दे। इस अवस्था में रहें और सांसें लें।

फायदा:
यह व्यायाम श्रोणि(पेल्विक) की मांसपेशियों पर जोर डालता है जिससे नीचे के हिस्से मजबूत होते हैं। यह आसन करने से नाभि के आस-पास की मांसपेशियां मजबूत बनती है तथा यौन ऊर्जा सम्भोग के प्रति संवेदनशील हो जाती है। इस आसन के करने से शरीर में रक्त संचार बढ़ता है तथा यौन इच्छा भी बढती है।

3. हलासन:

पेट के आस पास के अंगों के लिए हलासन बहुत ही फायदेमंद आसन है। यह आसन कंधे को फैलाता है, दिमाग को शांत करता है, राज्नोवृति को नियंत्रित करता है तथा पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है। इस आसन को करने के लिये सबसे पहले सर्वांग आसन में आ जाएं। अब अपने पैरों को अपने सिर के ऊपर से ले जाते हुए नीचे टिकाएं। इस अवस्था में कुछ देर रहें और सांसे लें।

फायदा:
यह व्यायाम पुरुषों में यौन शक्ति को बढ़ाता है। नियमित रूप से हलासन करने से शीघ्र पतन और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या में कमी आती है।

4. गोमुखासन:

यह आसन न केवल शीघ्रपतन को ठीक करता है बल्कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन(स्तम्भन दोष) से भी निजात दिलाने में मदद करता है। यह आसन करने से शरीर और दिमाग दोनों उर्जावान रहते हैं। इस आसन में आने के लिए फर्श पर बैठ जाएं, सांस लें और अपने दायें हाथ और पीठ को ऊपर उठायें। अब बायां हाथ उठायें और पीछे ले जा कर दायें हाथ की अंगुलियों को स्पर्श करें। दायें पैर को बाएं पैर पर रखें। कुछ देर सांसे ले और अब यही आसन दूसरी तरफ से करें।

5. वज्रासन:

वज्रासन कंधे और पेट के आस-पास की जगह को सीधा करता है। इस आसन को करने के लिए पैरों को इस तरह मोड़कर बैठें कि पैर आपके नितम्ब पैर की एड़ियों पर टिकी हो। इस अवस्था में अब पेट को थोड़ा सिकुड़ें और छाती चौड़ी करें।

फायदा:
यह आसन भी शरीर में रक्त संचार को बढाता है जिससे इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या दूर होती है। यह आसन जननांगों को मजबूत बनाता है।

6. मंडूकासन:

मंडूकासन जिसे अंग्रेजी में फ्रॉग पोज भी कहते हैं शीघ्र पतन और इरेक्टाइल डिसफंक्शन जैसे रोग को दूर करने में काफी सहायक होता है। इस आसन को करने के लिए पहले वज्रासन की अवस्था में आ जाएं। मुट्ठियां बंद करें और नाभि के पास रख लें। सांस छोड़ें और आगे की तरफ इस तरह झुकें की पेट जांघो के सहारे टिका हो। इस अवस्था में कुछ देर रहें और सांस लेते हुए सामान्य अवस्था में आ जाएं। [ये भी पढ़ें: मेनोपौज़ की स्थिति में दिखाई देते हैं यह लक्षण]

फायदा:
यह आसन करने से काम यौन शक्ति में इजाफा होता है तथा पुरुषों में बांझपन की समस्या को दूर करते हैं। यह आसान पुरुषों और महिलाओं दोनों में जननांगो से सम्बंधित विकार को दूर करता है।

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