जानिए शुक्राणु शरीर से कितनी देर बाहर जीवित रह सकता है

how long does sperm live outside the body

सीमन में 100-600 मिलियन शुक्राणु होते हैं। ओव्यूलेशन के बाद फैलोपियन ट्यूब में जाने के लिए एक शुक्राणु की जरुरत होती है जिससे एक नए जीवन की शुरुआत होती है। इस बारे में सुनकर ऐसा लगता है कि गर्भधारण करना आसान होता है। लेकिन कई शुक्राणु फैलोपियन ट्यूब तक पहुंचने से पहले ही मृत हो जाते हैं। इसके लिए इस बात का पता होना जरुरी होता है कि शुक्राणु शरीर के अंदर और बाहर कितनी देर तक रह सकते हैं। इस बारे में पता होने से आपको गर्भधारण करने या इससे गर्भधारण ना करने से बचने के बारे में पता चल जाता है। तो आइए आपको शुक्राणु के जीवित रहने से जुड़ी बातों के बारे में बताते हैं। [ये भी पढ़ें: यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की रोकथाम के लिए अपनाएं ये तरीकें]

शुक्राणुओं का जीवनकाल नियमित होता है। कुछ शुक्राणु मिनटों में ही नष्ट हो जाते हैं तो कुछ 7 दिन तक जीवित रह सकते हैं लेकिन तब ही जब वह सही कंडीशन में रखे जाएं। शुक्राणुओं का जीवनकाल इरैजुकेशन के बाद ही शुरु हो जाता है। शुक्राणु महिला के सर्विक्स, गर्भाशय से होते हुए फैलोपियन ट्यूब में जाते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान कई शुक्राणु कम होते जाते हैं। आधे से ज्यादा शुक्राणु बाहर चले जाते हैं जिनमें से 10-20 ही सही जगह तक पहुंच पाते हैं।

शुक्राणु महिला के शरीर के बाहर कुछ ही मिनट तक रह पाते हैं। शुक्राणुओं को जीवित रहने के लिए नमी और गर्माहट की जरुरत होती है। वेजाइना के पास सीमन होने की वजह से यह 20 मिनट तक जीवित रह पाते हैं। शुक्राणु के जीवित रहने की क्षमता को नहाते समय बढ़ाया जा सकता है। लेकिन पानी के साथ साबुन होने की वजह से यह बहुत जल्दी नष्ट भी हो जाते हैं। ओव्यूलेशन के दौरान प्रजनन मार्ग का पीएच लेवल कम होने से शुक्राणुओं को सर्विक्स की तरफ जाने में ज्यादा समय मिल जाता है। [ये भी पढ़ें: इन कारणों की वजह से आप सेक्स नहीं कर पाते हैं]

जो शुक्राणु सर्विक्स या गर्भाशय में चले जाते हैं तो उनका जीवनकाल लंबा हो जाता है। वह वहां 5 दिन तक जीवित रह सकते हैं। ज्यादातर शुक्राणु 1-2 दिन में नष्ट हो जाते हैं।

कुछ कारणों की वजह से शुक्राणुओं का जीवनकाल कम हो सकता है। अगर आप धूम्रपान करते हैं, वजन ज्यादा है, एल्कोहल का सेवन करते हैं तो शुक्राणु का जीवनकाल ज्यादा नहीं होता है। [ये भी पढ़ें: यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होने के कारण और लक्षण]

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