इन उपायों से दूर हो सकती है बांझपन की समस्या

causes and treatment for female infertility

आज महिलाओं में होने वाली फर्टिलिटी से संबंधित समस्या एक व्यापक रूप ले चुकी है। महिलाओं में होने वाली बांझपन (इनफर्टिलिटी) की समस्या के पीछे कई कारण माने जाते हैं। इनमें उम्र के बढ़ने से लेकर शरीर के भीतर कुछ ख़ास तरह के हार्मोन्स का न बनना भी हो सकता है। इस तरह की समस्या के लिए लोग सालों अपना इलाज कराते है जो न केवल समय लेते हैं साथ ही बहुत ज्यादा महंगें भी होते हैं। इसके बावजूद भी कई बार इसका इलाज संभव नहीं हो पाता है। आइए जानतें है कि वो कौन सी बातें है जिनके कारण महिलाओं में बांझपन की समस्या होती है और इसे कैसे दूर किया जा सकता है।

बांझपन के कारण:

1.हार्मोन्स की कमी:
कुछ महिलाओं में हार्मोन्स की कमी पायी जाती है जो इनफर्टिलिटी का सबसे बड़ा कारण होता है। कुछ महिलाओं को एंडोमेट्रिअम (अन्तःयोनि) में अण्डोत्सर्ग (ovulation) के लिए सिंक्रनाइज़ हार्मोनल परिवर्तन की जरूरत नहीं होती है। हार्मोन्स की कमी को आप खून की जांच करवा कर पता कर सकते हैं। [ये भी पढ़ें: प्रोस्टेट कैंसर से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय] 

2.डिम्ब नली(फेलोपियन ट्यूब) का क्षतिग्रस्त होना:
डिम्ब नली के गर्भधारण करने के लिए बहुत ही आवश्यक अंग होता है। महिलाओं में शुक्राणु डिम्ब नली में आते हैं, इसके बाद यह गर्भाशय में जा कर विकसित होने लगते हैं। इसमें किसी भी प्रकार की क्षति के बाद इनफर्टिलिटी की समस्या होने की संभावना होती है। यह क्षति इंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis), श्रोणि संक्रमण (pelvic infections) या सर्जरी और प्रजनन के दौरान शारीरिक आघात के कारण हो सकती हैं।

3.ग्रीवा (Cervical) की समस्याओं से:
महिलाओं में ग्रीवा की समस्या के कारण शुक्राणुओं को धारण करने में समस्या होती है। ग्रीवा की समस्या के पीछे बहुत से कारण होते है ज्यादा वजन उठाना, ज्यादा काम करना या सही पोजीशन में नहीं बैठना या सोना।

4.उम्र सीमा:
यह इनफर्टिलिटी के लिए सबसे जरुरी कारणों में से एक है। गर्भधारण करने के लिए निश्चित उम्र सीमा होती है उसके बाद गर्भधारण करना मुश्किल साबित होता है। महिलाओं की प्रजनन क्षमता 40 की उम्र तक घटने लगती है। एक शोध के अनुसार 30 की उम्र के बाद हर वर्ष महिलाओं में प्रजनन की क्षमता 4% कम होने लगती है।

बांझपन से बचने के उपाय:
बांझपन के उपचार के लिए आज बहुत से तरीकों को अपनाया जाता है इनमें से कुछ तरीके नीचे बताए गए हैं।

मेडिकल उपचार:
अगर आपको इस तरह की कोई समस्या है तो उसका सबसे अच्छा उपचार है कि आप अपने डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर आप में होने वाले हार्मोन्स कमी जैसी समस्या को ठीक करने के लिए सटीक उपचार भी बताएगें।

कृत्रिम गर्भाधान या अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान:
causes and treatment for female infertilityइंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन (आई.यू.आई.) यानि अंतरर्गर्भाशयी गर्भाधान, कृत्रिम गर्भाधान (असिस्टेड कंसेप्शन) का ही एक तरीका है। इसमें डॉक्टर कृत्रिम शुक्राणु महिलाओं के डिम्ब नली (फेलोपियन ट्यूब) में डाल देते है साथ इसके साथ वह कुछ दवाईयां भी देते है जिससे कि महिलाओं में गर्भधारण होता है। [ये भी पढ़ें: इन कारणों से होती है पुरुषों में नपुंसकता] 

लेप्रोस्कोपी:
श्रोणि रोग रखने वाली महिलाओं में लेप्रोस्कोपी के माध्यम से शरीर में इस तरह के टिशु को बनाया जाता है।

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन(आई.वी.एफ.):
causes and treatment for female infertilityयह अपने आप में एक अत्याधुनिक तकनीक है जिसके माध्यम से बहुत सी निसंतान दंपतियो को संतान मिली है। इस तकनीक के माध्यम से महिलाओं के अंडाशय से अंडे को निकाल कर बाहर से शुक्राणु को मिलाया जाता है और इसके बाद जब यह निषेचित हो जाता है तब इसे वापस गर्भाशय में डाल दिया जाता है।

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