महिलाओं में फर्टिलाइजेशन प्रोसेस कैसे काम करता है

How Fertilisation Process Works in Women

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फर्टिलाइजेशन स्पर्म और ओवम के संलयन की प्रक्रिया है जो एक दूसरे जीवन की शुरूआत करने में मदद करते हैं। शुक्राणु मेल गैमेट(नर युग्मक) है और एग फिमेल गैमेट(मादा युग्मक) है। फर्टिलाइजेशन तब शुरू होता है जब शुक्राणु एक ओओसाइट के साथ संपर्क में आता है। ज्योगोट(फर्टिलाइजेशन के बाद नए सेल्स का उत्पादन) दो में विभाजित होती है। फिर 4, 8, 16 कोशिकाओं में विभाजित होती है और आखिरकार वह एक बच्चे को जन्म देता है। [ये भी पढ़ें: जानिये क्या है पुरुषों में होने वाली रेट्रोग्रेड एजाकुलेशन की समस्या]

हर एक ऑक्वुलेटरी साइकल में हर 14 दिनों में अंडाशय से ओवम जारी होता है। महिला हार्मोन एफएसएच और एलएच के प्रभाव में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन ओवम के विकास और परिपक्वता को नियंत्रित करता है। प्रत्येक मेंस्ट्रुअल साइकल में प्री-ओव्युलेट्री फेज, ओव्युलेट्री फेज और मासिक धर्म का चरण होता है।

  • प्री-ओव्युलेट्री फेज:
    मासिक धर्म और ओव्यूलेशन के बीच के समय को प्री-ओव्युलेट्री फेज कहा जाता है। इस अवधि में एफएसएच और एलएएच कई गुना बढ़ जाती है। ये हार्मोन प्रत्येक 6-12 ओवेरियन फॉलिकल्स की वृद्धि को बढ़ावा देता है। हालांकि केवल एक फॉलिकल परिपक्व हो जाता है और ग्रैफियन फॉलिकल बन जाता है। यह फॉलिकल एस्ट्रोजेन को बढ़ाने में मदद करता है। ओव्यूलेशन से एक या दो दिन के लिए फॉलिकल प्रोजेस्टेरोन का उत्पादन शुरू करता है। [ये भी पढ़ें: डिप्रेशन कैसे सेक्स लाइफ को प्रभावित कर सकता है]
  • ओव्सुलेट्री फेज:
    एक परिपक्व ग्रैफियन फॉलिकल मेंस्ट्रुअल साइकल के 14 वें दिन के आसपास एक को रिलीज करता है। ओव्यूलेशन के बाद की अवधि को पोस्ट-ऑवलुलेटरी फेज कहा जाता है। रिलीज होने के बाद अंडाशय एक फैलोपियन ट्यूब में प्रवेश करता है और फिर गर्भाशय में जाता है। यदि यह शुक्राणु द्वारा निषेचित होता है, तो यह गर्भाशय में प्रत्यारोपित होता है और भ्रूण में विकसित होने लगता है।
  • मेंस्ट्रुअल साइकल:
    अगर ओवम शुक्राणु द्वारा फर्टिलाइज नहीं होता है तो यूटेरिन में एंडोमेट्रियम डिजेनेरेट होता है और मासिक धर्म के रूप में डिस्चार्ज होता है। प्रत्येक चक्र में मासिक धर्म प्रवाह 50-150 मिलीमीटर होता है। मासिक प्रवाह में रक्त, टिशू फ्लूइड, एन्डोमेट्रियम और कोशिकाएं शामिल होती हैं। [ये भी पढ़ें: पीरियड्स ना होने पर भी दर्द, क्या हो सकते हैं कारण]
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