गर्भनिरोध के प्राकृतिक तरीके

natural methods of contraception

गर्भनिरोध के प्राकृतिक तरीके से मतलब बिना किसी शारीरिक या हार्मोनल तरीके से गर्भधारण करने से रोकना। ओव्यूलेशन के समय अंडे के लिए उपलब्ध शुक्राणु से बचा जा सकता है। ऐसा कई तरीके हैं जिनमें पुरुष अपने सीमन को वेजाइना में जाने से रोक सकते हैं। ऐसे ही कई प्राकृतिक तरीके हैं जिससे गर्भधारण करने से बचा जा सकता है। तो आइए आपको इन कारणों के बारे में बताते हैं। [ये भी पढ़ें: बर्थ कंट्रोल शॉट के इस्तेमाल से शरीर पर दिख सकते हैं ये दुष्प्रभाव]

कैलेंडर रिदम मेथड: इस तरीके में महिला के ओव्यूलेशन की अवधि उनकी पिछले 12 पीरियड्स से लगाया जाता है। पिछली 12 मासिक धर्म की मदद से फर्टिलिटी के पहले और आखिरी दिन के बारे में पता किया जा सकता है। इसमें सबसे कम पीरियड्स के दिन से 18 दिन घटाकर और सबसे लंबे समय तक हुए पीरियड्स से 11 दिन घटाकर फर्टाइल दिन का पता करते हैं। इससे आपको ओव्यूलेट दिन के बारे में पता चल जाता है। आपकी पीरियड्स की साइकिल जितनी अनियमित होती है उतना ही महिलाओं के फर्टाइल दिन ज्यादा होते हैं।

सर्विकल म्यूकस मेथड: इस तरीके में सर्विकल म्यूकस और ओव्यूलेशन में संबंध होता है। सर्विकल म्यूकस को वेजाइना में सूखा या गीला की मदद से महसूस किया जा सकता है। जिन दिनों में गीला महसूस होता है वह महिला के फर्टाइल दिन होते हैं। यह तरीका सर्विकल म्यूकस और ओव्यूलेशन में संबंध के अवलोकन से किया जा सकता है। 28 दिन की मासिक अवधि में 10 दिन महिला को गीला महसूस होता है। इनके शुरुआती दिनों के 2-3 दिन चिपचिपा म्यूकस होता है। जिसमें से 3-5 दिन स्लिप्री प्रोफ्यूस म्यूकस होता है। म्यूकस की चिपचिपाहट से इसका पता किया जा सकता है। [ये भी पढ़ें: गर्भधारण को रोकने के अलावा और भी काम करती हैं गर्भनिरोधक दवाइयां]

बेसल बॉडी टेम्परेचर मेथड: ओव्यूलेशन के दौरान महिलाओं के शरीर का तापमान बढ़ जाता है। यह ओव्यूलेशन के ल्यूटल फेस के बाद 0.5 डिग्री बढ़ जाता है। महिलाओं के शरीर का तापमान मासिक धर्म के शुरुआती से आखिरी दिन तक तापमान में बदलाव होता है रहता है। खासकर बढ़ा रहता है।

सर्विकल पोजीशन: ओव्यूलेशन से पहले सर्विक्स अपेक्षाकृत लो और दृढ़ होती है। ओव्यूलेशन और फर्टिलिटी के दौरान सर्विक्स का आकार सामान्य की तुलना में बड़ा और मुलायम होता है। मासिक धर्म के दौरान सर्विक्स के बदलाव को महसूस किया जा सकता है। [ये भी पढ़ें: कितने प्रकार की होती हैं इमरजेंसी गर्भनिरोधक गोलियां]

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