जानिये गर्भनिरोधन से कैसे जुड़ा है लैक्टेशनल अमेनोरिया मेथड

lactational amenorrhea method for birth control

स्तन में दूध बनने की प्रक्रिया को लैक्टेशन कहते हैं और पीरियड ना आने की स्थिति को अमेनोरिया कहते हैं। इसलिए गर्भनिरोधन के इस तरीके का नाम लैक्टेशनल अमेनोरिया दिया गया है। गर्भनिरोधन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला यह अस्थायी तरीका होता है, जो स्तनपान पर निर्भर करता है। इस तरीके का इस्तेमाल बच्चे के जन्म के बाद 6 महीने तक किया जा सकता है। बच्चे के जन्म के 6 महीने के बाद इस तरीके की जगह गर्भनिरोधन के लिए किसी और तरीके का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इस तरीके को कारगर बनाने के लिए बार-बार स्तनपान कराना जरुरी होता है और इस बार पर भी ध्यान दिया जाता है कि नवजात शिशु पोषण के लिए सिर्फ स्तनपान ही करें, उसे कोई अन्य बेबी फ़ूड ना दिया जाये। [ये भी पढ़ें: गर्भनिरोधक गोलियों के असर को कम कर देते हैं ये कारक]

कैसे काम करता है ये तरीका:
lactational amenorrhea method for birth controlअगर कोई महिला 6 महीने तक लगातार अपने बच्चे को स्तनपान कराती है तो जो हॉर्मोन स्तन में दूध का निर्माण करते हैं, वो डिम्बाशय(ओवरी) में डिम्ब(एग) के निर्माण को 6 महीने तक बाधित करते हैं। इस दौरान महिला के पीरियड रुक जाते हैं जिस वजह से गर्भाधान नहीं हो पाता।

इस तरीके को कारगर बनाने के लिए इन शर्तों का पूरा होना जरुरी है:

  1. बच्चे की उम्र 6 महीने से कम होनी चाहिए।
  2. महिला को पीरियड नहीं होना चाहिए।
  3. महिला बच्चे को सिर्फ स्तनपान कराएं अन्य कोई बेबी फ़ूड न दें(कम से कम दिन में 4 घंटे तक और रात में 6 घंटे तक)।  [ये भी पढ़ें: जानिये गर्भनिरोधन से कैसे जुड़ा है लैक्टेशनल अमेनोरिया मेथड]

कितना कारगर है ये तरीका:  लैक्टेशनल अमेनोरिया गर्भनिरोधन में 98% से लेकर 99.5% तक सफल होता है।अगर इस तरीके के दौरान कभी भी पीरियड आ जाता है या बच्चे को स्तनपान के अलावा बेबी फ़ूड दिया जाने लगता है तब ये मान लेना चाहिए कि गर्भनिरोधन का ये तरीका काम नहीं कर रहा। अगर ये तरीका काम करना बंद करने लगे तो अनचाहे गर्भ से बचने के लिए तुरंत कंडोम का इस्तेमाल शुरू कर देना चाहिए।

लैक्टेशनल अमेनोरिया मेथड की विशेषताएं:

  • इसमें कोई खर्च नहीं लगता।
  • इस्तेमाल करने में बहुत आसान है।
  • अस्पताल या क्लीनिक जाने की कोई जरुरत नहीं।
  • किसी भी दवा के सेवन की जरूरत नहीं।
  • कोई भी हॉर्मोन स्तनपान को बाधित नहीं करता।
  • संभोग की क्रिया में भी कोई बाधा नहीं आती।

लैक्टेशनल अमेनोरिया मेथड की खामियां:

  • ये बच्चे के जन्म के बाद 6 महीने तक ही काम करता है।
  • अगर बच्चे को स्तनपान कराने के अलावा कोई अन्य बेबी फ़ूड दिया जाता है तो ये तरीका काम करना बंद कर देता है।
  • इस बात का अंदाजा लगाना बहुत ही मुश्किल है कि डिम्बाशय(ओवरी) डिम्बोत्सर्जन(ओवूलेशन) के लिए तैयार हुआ है या नहीं। जैसे ही पीरियड शुरू हो किसी अन्य गर्भनिरोधन के तरीके की जरुरत उत्पन्न होती है।
  • इस तरीके को कारगर बनाने के लिए बार-बार स्तनपान कराना बहुत ही जरुरी है। बार-बार स्तनपान कराना महिलाओं के लिए असहजता और परेशानी का सबब बन सकता है।
  • यह तरीका यौन संचारित रोगों से नहीं बचाता।

लैक्टेशनल अमेनोरिया मेथड से जुड़ीं अन्य जानकारियां:

  • यह तरीका महिलाओं को फिर से प्रेग्नेंसी से पहले की सामान्य अवस्था में ले जाने में मदद करता है।
  • महिलाओं को उनका सही वजन लौटाता है।
  • स्तनपान की वजह से होने वाला योनि में सूखापन लुब्रिकेंट्स की मदद से दूर किया जा सकता है।
  • एचआईवी से पीड़ित महिलाओं को अपने डॉक्टर से इस तरीके से होने वाले फायदों और खतरों के बारे में एक बार बात जरुर करनी चाहिए। [ये भी पढ़ें: डायाफ्राम के इस्तेमाल से पहले जान लें कुछ जरुरी बातें] 
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