गर्भरोधक के रुप में क्यों सबसे बेहतर है कंडोम

why condom is the best contraceptive

कंडोम गर्भनिरोधन का सबसे बेहतर और आसान तरीका है। आसान और बेहतर होने के कारण यह सबसे प्रचलित तरीकों में एक है। कंडोम शुक्राणुओं और गर्भाशय के मध्य एक दीवार की तरह काम करता है, जिसके कारण शुक्राणुओं का प्रवेश अंडकोष में नहीं हो पाता है और गर्भधारण से बच जाता है। इसके अलावा कंडोम के इस्तेमाल से यौन समस्याओं और यौन संक्रमण से भी बचा जा सकता है। आज महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए कंडोम बाजार में आ गये हैं, मगर दोनों का प्रयोग एक साथ नहीं किया जा सकता है। एक समय में पुरुष या महिला अपने हिसाब से इसका प्रयोग कर सकते है। तो आइए विस्तार से कंडोम के बारें में जानें।

कंडोम के प्रकार:
1. मेल कंडोम:
मेल कंडोम एक प्रकार का प्लास्टिक कवर होता है जो एकदम पतला होता है, जिसे पुरुष यौन संबंध स्थापित करते समय अपने लिंग पर धारण करते हैं, इसके बहुत से प्रकार होते हैं। जिसको आप अपने हिसाब से प्रयोग में ला सकतें हैं। मेल कंडोम से 15% तक गर्भधारण का खतरा होता है। [ये भी पढ़ें: गर्भनिरोधन में सबसे बेहतर है कॉपर टी] 

2. फीमेल कंडोम:
know why condom is the best contraceptiveफीमेल कंडोम भी मेल कंडोम की ही तरह होते हैं, यह भी प्लास्टिक के कवर की तरह होता है जिसको महिलाएं संबंध बनाने से पहले योनि के भीतर स्थापित करती हैं। इसके सही इस्तेमाल के लिए इसका प्रयोग सम्बन्ध बनाने के 8 घंटे पहले किया जाना चाहिए।। इसके प्रयोग से गर्भधारण का खतरा 21% रह जाता है।

लेटेक्स, प्लास्टिक या लेम्बस्किन (निर्माण के आधार पर):
कंडोम तीन प्रकार के होते है, लेटेक्स, प्लास्टिक या लम्बस्किन। ये तीन अलग-अलग तत्वों के नाम है जिससे कंडोम का निर्माण किया जाता है। ज्यादातर लोग लेटेक्स से बने कंडोम का प्रयोग करते हैं। अगर आप मटेरियल एलर्जिक है तो इसकी जगह पर प्लास्टिक कंडोम का भी प्रयोग किया जा सकता है। प्लास्टिक से बने कंडोम आपको एचआईवी, हर्पीस, गोनोरिया और क्लैमाइडिया जैसे यौन संचारित रोगों से बचाता है। अन्य प्रकार के यौन संबंधो के तरीको के लिए लेम्बस्किन का प्रयोग किया जाता है। यह किसी भी यौन संचारित रोगों से बचाव करने में असफल होता है।

ल्युब्रीकेशन:
कंडोम पर एक तरल ल्यूब्रिकेंट की एक परत होती है। जो यौन सम्बन्ध के दौरान होने वाले दर्द को कम करते हैं। साथ ही साथ यह कंडोम के फटने की परेशानी को भी दूर करता है।

स्प्रेमीसाइड:
स्प्रमीसाइड ऐसे रसायन होते है जो शुक्राणुओं को खत्म करने का काम करते है। कुछ कंडोम पर यह पहले से लगा होता है। यह जेल या क्रीम के रूप में होता है। इसे संबंध बनाते समय योनि के मुख पर लगाया जाता है और इसको कंडोम के साथ प्रयोग में लाया जाता है। यह गर्भधारण करने के खतरों को और कम कर देता है।

कंडोम का सही इस्तेमाल:
know why condom is the best contraceptiveइसके काम करने का सही तरीका प्रयोग करने वाले पर निर्भर करता है। यदि कंडोम का सही से प्रयोग न करें तो गर्भधारण का खतरा बना रहता है। एक साल में 100 में 2 महिलाओं में हमेशा खतरा होता है कि कंडोम का प्रयोग होने के बावजूद भी गर्भधारण हो जाता है, वहीं जब भी एक कंडोम का सही प्रयोग नहीं करता है तब यह संख्या 100 में 18 हो जाती है। इसके साथ ही कंडोम यौन सम्बंधित बीमारियों से बचाने में बहुत ही कारगर सिद्ध हुआ है। [ये भी पढ़ें: प्रयोग से पहले जान लें इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स के बारें में] 

इसको प्रयोग में कैसे लायें और किन बातों का ध्यान रखें?
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  • इस बात का ध्यान रखें कि जब भी कंडोम को पैकेट से निकाले तो उसमे को छेद नही हो।
  • अगर कंडोम के प्रयोग की खत्म हो चुकी है या कंडोम एक्सपायर हो चुका है, तो उसका प्रयोग न करें।
  • कंडोम का प्रयोग तब करें जब आप सम्बन्ध के लिए तैयार हो।
  • इसको शुरू से अंत तक पहन के रखें।
  • हर बार संबंध बनाते वक्त नए कंडोम का प्रयोग करें एक ही कंडोम का इस्तेमाल बार बार नहीं करना चाहिए।
  • अगर आपको लगता है कि प्रकिया के बीच में यह फट गया है फिर उसमे छेद हो गया है तो उसको सावधानी से निकाले और साथ ही नया कंडोम पहने।
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