क्या होता है गर्भनिरोधक गोलियों का लो और अल्ट्रा लो डोज

know about low and ultra low dose of contraceptive pills

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गर्भनिरोधक पिल्स में कुछ हार्मोन्स होते हैं जो गर्भधारण को रोकते हैं। इस तरह के पिल्स में दो तरह के हार्मोन्स एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन पाए जाते हैं। कुछ पिल्स ऐसे होते हैं जिनमें सिर्फ एस्ट्रोजन होता है इनमें अन्य कई रसायन भी मिले होते है। गर्भनिरोध पिल्स से होने वाले फायदे और नुकसान इसके सही डोज पर निर्भर करते है, किसी भी पिल्स या दवाइयों को उसकी निश्चित मात्रा में लेना बहुत जरूरी होता है। उस निश्चित मात्रा से कम लेने पर यह असरकारक नहीं होते है और ज्यादा निश्चित मात्रा में सेवन करने पर नुकसान होने की आशंका होती है। गर्भनिरोधक पिल्स भी इसी सिद्धांत पर काम करते हैं। गर्भनिरोधक पिल्स को हमेशा लो डोज या फिर अल्ट्रा लो डोज लेना चाहिए ताकि उससे कोई साइड इफैक्ट न हो सके। तो आइए जानते हैं लो डोज और अल्ट्रा लो डोज के बारें में।

लो डोज क्या है?
 know about low and ultra low dose of contraceptive pillsगर्भनिरोधक पिल्स में एस्ट्रोजन ज्यादा मात्रा में पाया जाता है, उससे सिर दर्द, स्तनों का ढीलापन, मासिक चक्र में रूकावट अन्य काफी तरह के साइड इफेक्ट देखने को मिलते हैं। जब से इस पिल्स का अविष्कार किया गया है तब से लेकर आज तक इसमें बहुत से बदलाव देखने को मिले हैं। पहली बार जब इसको बनाया गया था तब इसमें 150 माइक्रोग्राम एस्ट्रोजन पाया जाता था और साथ ही साथ इसके साइड इफेक्ट भी थे, पर आज इसमें 50 माइक्रोग्राम पाया जाता है। मौजूदा समय में लो डोज पिल्स में सबसे कम एस्ट्रोजन 35 माइक्रोग्राम पाया जाता है, इसी वजह से इसे लो डोज कहा जाता है। यह सबसे सुरक्षित और प्रभावशाली होता है जिसके सेवन के साथ इससे कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। [ ये भी पढ़ें: डायाफ्राम के इस्तेमाल से पहले जान लें कुछ जरुरी बातें] 

अल्ट्रा लो डोज क्या है?
लो डोज के बाद अब गर्भनिरोध के अल्ट्रा डोज भी बाजार में आ गये हैं, जिसके आने के बाद इन पिल्स को लेना बहुत ही आसान हो गया है। साथ ही ये स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहतर हैं क्योंकि इनका साइड इफेक्ट नहीं होता है। इसमें एस्ट्रोजन की मात्रा मात्र 20 माइक्रोग्राम ही होती है। इस तरह के अल्ट्रा लो डोज पिल्स को अन्य गर्भनिरोधक पिल्स की जगह पर बहुत अच्छा माना जाता है।

पिल्स कैसे काम करता है?
 know about low and ultra low dose of contraceptive pillsएस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन ऐसे हार्मोन्स होते हैं जो महिलाओं के शरीर में गर्भधारण के लिए अण्डों को तैयार करता है। अगर अंडे के मध्य शुक्राणुओं का फर्टिलाइजेशन नहीं होता है, तो इन हार्मोन्स में तेजी से गिरावट होने होने लगती है। गर्भनिरोधक दवाइयों में भी यही दो तरह के हार्मोन्स होते है लेकिन यह हार्मोन्स कृत्रिम होते है और यहां ये हार्मोन्स अलग तरीके से काम करते हैं। यहां पर ये दोनों हार्मोन्स प्राकृतिक एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन से एकदम उलट काम करते हैं। इससे महिलाओं में होने वाले अण्डों में गिरावट होने लगती है और यही कारण बनता है जिससे गर्भधारण नहीं हो पाता है। [ये भी पढ़ें: जन्म नियंत्रण पैच के बारे में जानें कुछ खास बातें]

लो डोज और अल्ट्रा लो डोज के साइड इफेक्ट:
कभी कभी इस तरह के पिल्स से भी साइड इफेक्ट होते है। इससे होने वाले साइड इफेक्ट में महिलाओं के स्तनों से खून आने लगता है। इसके साथ-साथ उनमें ढीलापन भी देखने को मिलता है। इसके साथ-साथ भविष्य में गर्भधारण होने की संभवनाओं को भी कम करता है।

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