Too much belly fat: अत्यधिक बेली फैट होने के नुकसान

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Dangers of Deep Belly Fat

बहुत अधिक बेली फैट कई बीमारियों के खतरे को बढ़ा देता है।

Too much belly fat: बहुत अधिक बेली फैट होने या मोटापे से ग्रस्त होना शरीर के स्वास्थ्य को प्रभावित होता है। यह न केवल आपको शर्मिंदा महसूस कराता है बल्कि आपके आत्मविश्वास को भी कम करता है। इतना ही नहीं, अधिक वजन होने और बहुत अधिक बेली फैट होने से आपको कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है। तनाव, अवसाद, चिंता, उच्च रक्तचाप, हाई कोलेस्ट्रॉल, हृदय संबंधी रोग, सुस्ती आदि समस्याएं अत्यधिक बेली फैट होने के कारण होती हैं। फैट शरीर में ऊर्जा स्टोर करने में मदद करता है। फैट दो प्रकार के होते हैं- सबक्यूटेनियस फैट वसा और विसेरल फैट। विसेरल फैट स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होता है क्योंकि यह शरीर के प्रमुख हिस्सों जैसे पेट, दिल, लिवर, फेफड़ों के आसपास स्टोर होता है। आइए जानते हैं अत्यधिक बेली फैट होने के नुकसान। [ये भी पढ़ें: सोते समय बेली फैट कम करने के लिए कौन से फल और सब्जियों का सेवन करें]

अत्यधिक बेली फैट क्यों नुकसानदायक होता है

  • इंफ्लेमेशन
  • डायबिटीज का खतरा
  • ब्लड प्रेशर बढ़ता है
  • इंसोम्निया
  • हृदय संबंधी रोग

इंफ्लेमेशन

risks of excess belly fa
अतिरिक्त बेली फाट शरीर में सूजन को बढ़ा देता है और कई बीमारियों का कारण बनता है।

विसेरल फैट शरीर में इंफ्लेमेशन को बढ़ा देता है क्योंकि यह सीधे लिवर पर असर करता है। इंफ्लेमेशन के कारण शरीर में कई संक्रमण और समस्याएं हो सकती हैं। यह शरीर के हार्मोनल संतुलन को भी बिगाड़ देता है और मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित करता है।

डायबिटीज का खतरा

Why is it more dangerous to have belly fat
पेट के आसपास अतिरिक्त फैट जमा होना डायबिटीज के खतरे को बढ़ाता है।

बेली पर जमा फैट बाहों, कूल्हों और जांघों पर जमा फैट से ज्यादा हानिकारक होता है। यह शरीर में टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को बढ़ा देता है। विसेरल फैट शरीर में इंसुलिन के उत्पादन को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह रक्त में इंसुलिन का प्रवाह बढ़ाता है जिससे हमारा शरीर रक्त में हाई शुगर और इंसुलिन लेवल का आदी हो जाता है। इससे यह डायबिटीज के खतरे का कारण बनता है।

ब्लड प्रेशर बढ़ता है
शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ने से ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। जब शरीर हाई शुगर और खून में इंसुलिन के स्तर के प्रति प्रतिरोध करता है, तो यह अक्सर हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनता है। यह स्वास्थ्य समस्या हार्ट स्ट्रोक का कारण भी बन सकती है। [ये भी पढ़ें: नींबू पानी बेली फैट को कैसे कम करता है]

इंसोम्निया
मोटापा या अत्यधिक बेली फैट नींद ना आने की समस्या का कारण भी बन सकता है। आपको नींद आने में परेशानी होती है क्योंकि यह चिंता, खर्राटें, स्लीप एप्निया आदि का कारण बनता है। इसलिए, इन सभी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए आपको अतिरिक्त बेली फैट को कम करने की कोशिश करनी चाहिए।

हृदय संबंधी रोग
बहुत अधिक बेली फैट होने से कार्डियोवैस्कुलर डिजीजी का खतरा बढ़ जाता है। ब्लड प्रेशर ज्यादा होने से रक्त वाहिकाओं पर लगातार दबाव पड़ता है। इसके अलावा, इंफ्लेमेशन बढ़ने से दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है।

[जरुर पढ़ें: कारण जिनसे आपके पेट पर अतिरिक्त चर्बी जमा हो जाती है]

अतिरिक्त बेली फैट को कम करना बेहद जरुरी है क्योंकि यह आपके जीवन के लिए खतरा हो सकता है। आप इस आर्टिकल को इंग्लिश में भी पढ़ सकते हैं।

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