कैलिस्थेनिक्स ट्रेनिंग क्या है और उसके लाभ

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Know more about calisthenic workout and its benefits

हर कोई फिट रहना चाहता है। इस संबंध में लोग वांछित फिटनेस लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न एक्सरसाइज का अभ्यास करते हैं। यदि आप जल्द से जल्द वांछित फिटनेस लक्ष्य प्राप्त करना चाहते हैं तो कैलिस्थेनिक्स ट्रेनिंग आपके लिए एक बेहतर विकल्प होता है। कैलिस्थेनिक्स ट्रेनिंग एक प्रशिक्षण कार्यक्रम है जिसमें कोई अतिरिक्त वजन नहीं होता है और इसे बॉडी वेट ट्रेनिंग के रूप में भी जाना जाता है। यह प्रशिक्षण वजन घटाने, फिटनेस और मांसपेशियों को प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है। कैलिस्थेनिक्स ट्रेनिंग का अभ्यास कोई भी कर सकता है। इस प्रशिक्षण में कई फायदे हैं जैसे कि मांसपेशियों में ताकत, धैर्य, जोड़ों और पूरे शरीर में ताकत और मजबूती। प्रशिक्षण आपको जल्द से जल्द परिणाम प्रदान करता है। इसके अलावा, यह प्रशिक्षण कहीं भी किया जा सकता है।  [ये भी पढ़ें: बेंच की मदद से कैसे फुल बॉडी वर्कआउट करें]

कैलिस्थेनिक्स ट्रेनिंग के फायदे:

कहीं भी अभ्यास कर सकते हैं:
बॉडी-वेट ट्रेनिंग कहीं भी करना बहुत आसान होता है। आपको केवल कैलिस्थेनिक्स ट्रेनिंग का अभ्यास करने की जगह की जरूरत होती है।

अधिक उपकरण की आवश्यकता नहीं है:
कैलिस्थेनिक्स ट्रेनिंग का अभ्यास करने के लिए आपको भारी डंबल या किसी भी उपकरण की आवश्यकता नहीं होती है।  [ये भी पढ़ें: पुल-अप एक्सरसाइज करते वक्त की जाने वाली आम गलतियां]

अपनी गति को नियंत्रित कर सकते हैं:
कैलिस्थेनिक्स ट्रेनिंग का प्रमुख लाभ यह है कि आप इसे अपनी गति से अभ्यास कर सकते हैं। यह प्रशिक्षण आपको बहुत समय बचाने में मदद करता है।

कैलिस्थेनिक्स ट्रेनिंग का अभ्यास क्यों करना चाहिए:

ताकत बढ़ाता है:
ट्रेनिंग आपके पूर्ण शरीर की ताकत प्रदान करता है और शरीर को नियंत्रित भी करने में मदद करता है। इस ट्रेनिंग का अभ्यास करने के लिए आपको शरीर को संतुलित रखने की जरूरत होती है।

कमजोर मांसपेशियों को मजबूत करता है:
यह ट्रेनिंग मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करने में मदद करता है। जब आप पुल-अप करते हैं, तो यह आपके लैट्स, रोम्बॉइड्स, लंबल, मिडिअल, ट्रैप्स, एब्डॉमिनल, बाइसेप्स, फोरआर्म्स और ग्लुट्स पर जोर देता है।

जोड़ों में सुधार लाता है:
कैलिस्थेनिक्स ट्रेनिंग में थेराप्यूटिक इफेक्ट होता है जो जोड़ों के दर्द में सुधार लाता है। यदि आप सही मात्रा और आवृत्ति के साथ ट्रेनिंग का अभ्यास करते हैं तो यह आपके कुछ कमजोर जोड़ों को भी मजबूत करने में मदद करता है। यदि आप पुश-अप का सही ढंग से अभ्यास करते हैं तो यह हेवीवेट के बिना अपनी क्षमता के पूर्ण स्पेक्ट्रम में जोड़ को आगे बढ़ाता है। [ये भी पढ़ें: वजन ज्यादा है तो एक्सरसाइज करना कैसे शुरु करें]

 

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