रनिंग के लिए कैसे स्टेमिना बढ़ाएं

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how to increase your stamina for running

क्या आप किसी दौड़ को पूरा करने से पहले ही हाफने लगते हैं? या थोड़ा सा भागने पर आपकी सांस फूल जाती है और आप थक जाते हैं? तो इसके लिए आपको अपना स्टेमिना और मसल्स की ताकत बढ़ाने की जरुरत है। अगर आपको स्टेमिना बढ़ाना है तो इसके लिए आपको अभ्यास करने और कुछ ट्रिक्स को आजमाने की जरुरत है। इन ट्रिक्स की मदद से आपको दौड़ने के लिए स्टेमिना तो मिलेगा ही साथ ही आप बिना थके दूर तक दौड़ पाएंगे। रनिंग की मदद से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर हो जाती हैं। साथ ही दौड़ने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है जिससे इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है। तो आइए आपको इन ट्रिक्स के बारे में बताते हैं जो रनिंग के लिए आपका स्टेमिना बढ़ाने में मदद करेंगे। [ये भी पढ़ें: चिकन के अलावा मसल्स बनाने के लिए क्या खाएं]

वार्मअप: जिस तरह से किसी भी एक्सरसाइज को करने से पहले वार्मअप करना जरुरी होता है। उसी तरह रनिंग से पहले भी वार्मअप करना चाहिए। रनिंग से पहले 10 मिनट तर मसल्स को वार्मअप करें। कंधों, गर्दन और कलाई को घुमाएं साथ ही जम्पिंग जैक करें। इससे आपकी हृदय दर और मांसपेशियों की परफार्मेंस में सुधार होता है।

वेट ट्रेनिंग: रनिंग के लिए स्टेमिना को बढ़ाने के लिए अपने वर्कआउट में वेट ट्रेनिंग शामिल करना ना भूलें। रनिंग सिर्फ कार्डियो नहीं है बल्कि यह लंबी दूर तक दौड़ने के लिए पैरों को मजबूती प्रदान करती हैं। अपनी पैर की मांसपेशियों पर काम करें इससे पैर मजबूत होते हैं और स्टेमिना बढ़ाने में मदद मिलती है। [ये भी पढ़ें: वर्कआउट में किन चीजों को शामिल करके ज्यादा कैलोरी बर्न की जा सकती है]

इंटरवेल रन: स्टेमिना बढ़ाने के लिए यह सबसे अच्छा विकल्प है। इसमें आपको बराबर समय तक दौड़ना और चलना होता है। जैसे अगर आप 2 मिनट तक तेज दौड़ रहे हैं तो उसके बाद अगले 2 मिनट धीरे चलना होता है। इससे आप लंबी दूरी को आसानी से पार कर लेते हैं। इंटरवेल रन से आप जल्दी थकते भी नहीं है और स्टेमिना भी बढ़ता है।

म्यूजिक सुनें: दौड़ते समय संगीत सुनने से आपको मोटिवेशन मिलती है। अच्छी बीट के गाने सुनने से आप मोटिवेटिड होते हैं और पैरों के दर्द को भी भूल जाते हैं। जिससे आप लंबे समय तक दौड़ पाते हैं।

प्लायोमेट्रिक: प्लायोमेट्रिक एक्सरसाइज होती है जिसमें कूदना, स्क्वाट, बर्पीज शामिल होती हैं। यह एक्सरसाइज आपकी कार्डियोवॉस्कुलर स्ट्रेंथ, स्टेमिना और पैरों की स्ट्रेंथ बढ़ाने में मदद करती है। [ये भी पढ़ें: जिम में वर्कआउट करने पर क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं]

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