छोटे-छोटे वर्कआउट की मदद से कैसे बनाएं बड़ी और शानदार मसल्स

build big muscles with the help of short workout

आमतौर पर लोग यह मानते हैं कि बड़ी और शानदार मसल्स के लिए सिर्फ भारी वेट के साथ लंबा वर्कआउट करना चाहिए। लेकिन ऐसा करने से मसल्स ग्रोथ स्थगित हो जाती है, क्योंकि मसल्स को बड़ा और विकसित होने के लिए विविधता के साथ पर्याप्त दबाव चाहिए, जो कि हाई इंटेंसिटी और लो वॉल्यूम स्प्लिट वर्कआउट अच्छी तरह प्रदान करता है। यह वर्कआउट छोटा होता है और इसमें एक्सरसाइज वेट को हर सेट पर कम करना होता है। इन दोनों वर्कआउट को मिलाकर करने से आपकी मसल्स बड़ी और ताकतवर हो जाती हैं, तो आइये जानते हैं कि यह दोनों वर्कआउट क्या है और कैसे किया जाता है। [ये भी पढ़ें: एक्सरसाइज नहीं करने से शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव]

हाई-इंटेंसिटी और लो वॉल्यूम स्प्लिट वर्कआउट क्या होता है:
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हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट वह वर्कआउट होता है, जिसमें आप एक्सरसाइज के रैप्स और सेट्स के बीच कम से कम आराम लेते हैं और एक्सरसाइज को मसल्स की सारी ताकत खत्म होने तक करते हैं। दूसरी ओर लो वॉल्यूम स्प्लिट वर्कआउट में एक सेशन में एक मसल्स ग्रुप की 3-4 एक्सरसाइज के सिर्फ 2 सेट्स किए जाते हैं। इन दोनों वर्कआउट का मिश्रण करने के लिए आपको एक वर्कआउट सेशन में एक मसल्स ग्रुप की 4 एक्सरसाइज के 2 सेट्स पूरी ताकत के साथ करने होते हैं। सेट्स करते हुए ध्यान रखें कि रैप्स शारीरिक ताकत के खत्म होने पर ही रोके।

हाई-इंटेंसिटी लो वॉल्यूम वर्कआउट को बेहतर बनाने के टिप्स:
1. सेट: सबसे जरुरी बात यह है कि आपको वर्कआउट सेट्स को बिल्कुल थक जाने तक करना है, ऐसा करने से मसल्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और उनकी क्षमता का विकास होता है।[ये भी पढ़ें: मसल्स ग्रोथ के लिए BCAA सप्लीमेंट के फायदे और नुकसान क्या हैं]

2. आराम: इसमें ध्यान रखें कि रैप्स के बीच में एक सेकेंड रूकें, जिससे मसल्स को साथ-साथ रिकवर होने का भी वक्त मिलता रहे और एक सेट करने के बाद सिर्फ 20-30 सेकेंड आराम करें और फिर बिल्कुल थक जाने तक दूसरा सेट करें।

3. आखिरी रैप: किसी भी सेट का आखिरी रैप करते हुए वेट को ज्यादा से ज्यादा देर उठाए रखने की कोशिश करें। क्योंकि ऐसा करने से मसल्स पर गहरा तनाव पड़ता है और मसल्स की ताकत बढ़ती है।

4. अधूरे रैप्स: यह टिप तब अपनाया जाता है जब आप सेट के आखिर में पूरे रैप्स नहीं कर पाते हैं, मसल्स पर बराबर तनाव रखने के लिए आप आधे-अधूरे रैप्स भी कर सकते हैं जब तक कि आप थक नहीं जाते हैं।

5. नेगेटिव रैप्स: इस वर्कआउट में हर सेट पर पहले से हल्का वजन लगाना चाहिए। ऐसा करने से आपकी मसल्स में मौजूद माइक्रो-ट्रामा ज्यादा सक्रिय होते हैं और बेहतरीन प्रभाव देते हैं।

बैक मसल्स ग्रुप के लिए हाई-इंटेंसिटी लो वॉल्यूम वर्कआउट का उदाहरण:

    • पुल-अप्स                             बिल्कुल थक जाने तक 2 सेट्स
    • बारबेल बेंट-ओवर रो             बिल्कुल थक जाने तक 2 सेट्स
    • लैट पुलडाउन                       बिल्कुल थक जाने तक 2 सेट्स
    • चेस्ट सपोर्टेड रिवर्स फ्लाई       बिल्कुल थक जाने तक 2 सेट्स।[ये भी पढ़ें: रिवर्स प्लैंक की मदद से बनाएं मजबूत कोर और लोवर बॉडी]
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